देवरिया। भारत की बायोलॉजिस्ट और वन्यजीव संरक्षणकर्ता पूर्णिमा देवी बर्मन ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पूर्णिमा देवी को टाइम मैगजीन की ‘वुमन ऑफ द ईयर 2025’ की लीस्ट में जगह दी गई है। इस लिस्ट में पूरी दुनिया भर से महिलाओं के नाम जोड़े जाते हैं। इस बार इस सूची में कुल 13 महिलाओं को जगह दी गई है। इन 13 महिलाओं में से सभी ने समाज के लिए कुछ बड़ा और सराहनीय काम किया है।
पूर्णिमा इस सूची में अकेली भारतीय महिला
दुनियाभर में सामाजिक साकात्मक बदलाव लाने वाली महिलाओं की सूची में भारतीय महिला का नाम आना गर्व की बात है। आपको बता दें पूर्णिमा देवी बर्मन 13 महिलाओं की सूची में इकलौती भारतीय महिला हैं। इस लिस्ट में हॉलीवुड एक्ट्रेस निकोल किडमैन और फ्रांस की गिसेल पेलिकोट का नाम भी शामिल है। दोनों ने ही महिलाओं पर होने वाले यौन हिंसा के खिलाफ कई साहसिक कदम उठाएं हैं। और यौन हिंसा पीड़ित महिलाओं को समाजा में आगे बढ़ने में मदद की है।
एक घटना ने बदली पूर्णिमा के जीवन की दिशा
पूर्णिमा देवी एक बायोलॉजिस्ट हैं उनके जीवन की दिशा एक छोटी से घटना ने बदल दी। 2007 में असम में एक पेड़ को काटा जा रहा था। पेड़ पर हर्गिला पक्षी जिसे ग्रेटर एडजुटेंट स्टॉर्क भी कहते हैं के कई घोंसले थे। पेड़ काटने का विरोध करने पर लोगों ने उनका मजाक बनाया। लेकिन उनके मन में उन पक्षियों और उनके छोटे बच्चों की चिंता थी जिनका बसेरा उस पेड़ पर था। तभी से उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कुछ बड़ा करने और असम में हर्गिला पक्षियों को संरक्षित करने की ठान ली।
हर्गिला के सरंक्षण में निभाई बड़ी भूमिका
असम में ही पाए जाने वाले हर्गिला पक्षियों की संख्या तेजी से कम हो रही थी। उस वक्त राज्य में सिर्फ 450 हर्गिला ही बचे थे। लेकिन पूर्णिमा के लगातर किए गए प्रयासों से आज इनकी संख्या बढ़कर 1,800 से ज्यादा हो गई है। इतना ही नहीं 2023 में इस पक्षी की स्थिति इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) की लिस्ट में ‘लुप्तप्राय’ से बदलकर निकट संकटग्रस्त कर दी गई।
‘हर्गिला आर्मी’ के नाम से चलाया अभियान
हर्गिला पक्षियों को बचाने के लिए पूर्णिमा ने महिलाओं की एक टीम बनाई और उसे ‘हर्गिला आर्मी’ नाम दिया। 20 हजार से ज्यादा महिलाएं के इस समूह ने पक्षियों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए। साथ ही लोगों को इनके महत्व के बारे में जागरूक करती हैं। अब यह अभियान असम से भारत के अन्य हिस्सों और कंबोडिया तक फैल चुका है। हर्गिला आर्मी के लिए यह तब और गर्व की बात बन गई जब फ्रांस के स्कूलों में भी उनके काम को सिलेबस का हिस्सा बनाया गया।
पूर्णिमा ने हर्गिला को लोगों के जीवन से जोड़ा
हर्गिला को बचाने के लिए पूर्णिमा देवी बर्मन ने हर्गिला लोगों की संस्कृति से जोड़ना शुरु किया। महिलाओं को हर्गिला पक्षी की डिजाइन वाली साड़ियां और शॉल बुनना सिखाया जिससे वो आत्म निर्भर भी बनीं। हर्गिला से जुड़े गाने और उत्सव भी किए गए। इस तरह हर्गिला अब असम के लोगों के रोजमर्रा के जीवन और उनकीसंस्कृति का अहम हिस्सा बन चुका है।