देवरिया। मंगलवार को नीट पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने नीट पेपर के दोबारा नहीं होने का फैसला सुनाया है। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि केंद्र सरकार, NTA ने अपनी बातें रखीं, सीबीआई के एडिशनल डायरेक्टर ने भी कोर्ट की सहायता की। यह मामला बड़ी संख्या में छात्रों को प्रभावित करने वाला है। इसलिए हम दोबारा परीक्षा को सही मानते।


परीक्षा की पवित्रता पूरी तरह प्रभावित नहीं: CJI

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि- “अभी तक जांच अधूरी है। हमने केंद्र से भी जवाब मांगा था कि 4750 केंद्रों में से कहां-कहां गड़बड़ी रही। अभी तक उपलब्ध सामग्रियों के हिसाब से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि परीक्षा की पवित्रता पूरी तरह प्रभावित नहीं हुई है। इस साल के नतीजों की तुलना पिछले 3 साल के आंकड़ों से भी कम है। इससे भी ऐसा नहीं लगा कि व्यापक गड़बड़ी है। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि गलत तरीके अपनाने वाला कोई भी छात्र फायदा न उठा सके, न भविष्य में दाखिला पा सकें। दोबारा परीक्षा का 20 लाख से ज्यादा छात्रों पर इसका असर पड़ेगा। अकादमिक सत्र गड़बड़ा जाएगा, पढ़ाई में देरी होगी। इसलिए हम दोबारा परीक्षा को न्यायोचित नहीं मानते।”


पिछली सुनवाई नंबर अपलोड करने का दिया था आदेश
मामले की पिछली सुनवाई 18 जुलाई को हुई थी जिसमें सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने एनटीए को ऑनलाइन रिजल्ट अपलोडक करने का आदेश जारी किया था। कोर्ट ने परीक्षार्थियों की पहचान उजागर ना करते हुए नीट-यूजी परीक्षा में स्टूडेंट्स द्वारा प्राप्त नंबरो को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था।

केंद्र बदले जाने पर भी हुआ सवाल

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने एनटीए से केंद्र बदले जाने को लेकर भी सवाल किया कि- “क्या उसके पास कोई डेटा है जिससे पता चले कि 1 लाख 8 हजार स्टूडेंट्स ने अपना केंद्र बदला है? यह देखना जरूरी है कि संदिग्ध केंद्र बदला गया था या नहीं। एनटीए ने जवाब दिया कि परीक्षा से 2 दिन पहले ही केंद्र आवंटित किया जाता है, इसलिए इस बारे में किसी को कुछ पता नहीं है।