Portrait of a confident young businesswoman working in a modern office

देवरिया। ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध के मुताबिक किसी कंपनी के शीर्ष पद पर कोई महिला बैठी हो या पुरुष, इससे उस कंपनी के मुनाफे पर कोई फर्क नहीं पड़ता। मैनेजेरियल पोस्ट पर किसी महिला या पुरुष के होने की बजाय इस बात से ज्यादा फर्क पड़ता है कि वह कितना समझदार है। उसकी मार्केटिंग रणनीति और बाजार के प्रति समझ कैसी है। उसे अपने सहकर्मियों का कितना सहयोग मिलता है।

2 हजार 483 कंपनियों के निदेशकों पर हुआ शोध

यह शोध साल 2000 से 2016 तक दुनिया की 2483 कंपनियों के निदेशकों पर किया गया। इसमें पता चला कि कंपनी के सीईओ के जेंडर से कोई फर्क नहीं पड़ता। दरअसल, यूनिवर्सिटी के क्रॉफर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी के रिसर्चर निकोलस बेली, रॉबर्ट ब्रुनिग और क्रिस वोकर ने कंपनियों के लाभ-हानि और शेयरों की कीमत के बीच संबंधों के विश्लेषण पर हुए कई शोधों का अध्ययन किया। उसके बाद इस नतीजे पर पहुंचे।


बड़े पदों पर महिलाओं की संख्या में बढ़ोतरी
एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि यह अध्ययन साल 2000 से 2016 तक किया गया है, जबकि साल 2016 के बाद से कंपनियों में महत्वपूर्ण पदों पर महिलाओं की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। जहां साल 2016 में दुनिया भर में कंपनियों के महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त महिलाएं लगभग 20% थीं, वहीं वर्तमान में ये संख्या 37% के पास पहुंच गई है।