देवभूमि हिमाचल के पारंपरिक लोक गायन, झूरी, नाटी और श्री रोशन लाल की कला यात्रा पर एक विस्तृत लेख। जानें हिमाचल के संगीत का इतिहास और भूगोल।हिमाचल प्रदेश के लोकगायक रोशनलाल सैनी ने समां बांध दिया।

शिमला/देवरिया। हर समाज के लोकगीत उनके इतिहास और भूगोल से बनते हैं। उनमें उनकी संस्कृति, परंपराएं, ऋति-रिवाज, बोलियां सब समाहित होती हैं। सदियों से इकट्टा ज्ञान भी समाज अपने लोकगीतों के जरिए पीढ़ी दर पीढ़ी संजोकर रखता है और नई पीढ़ी को देता है। हिमाचल प्रदेश का संगीत भी सीधे तौर पर वहां की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और आध्यात्मिक परिवेश से जुड़ा है। ऊँचे पहाड़, गहरी घाटियों और बर्फबारी के बीच यहाँ ‘झूरी’, ‘लामन’, और ‘नाटी’ जैसे लोकगायन विकसित हुए।

यूट्यूब और ग्लोबल म्यूजिक प्लेटफॉर्म्स पर छा रही हिमाचली गीत

आज के दौर में जहाँ पॉप संगीत का बोलबाला है, रोशन लाल जैसे कलाकार अपनी पारंपरिक विरासत को संजोए हुए हैं। वर्तमान में हिमाचली लोक संगीत अब केवल मेलों (लवी, कुल्लू दशहरा) तक सीमित नहीं है, बल्कि यूट्यूब और ग्लोबल म्यूजिक प्लेटफॉर्म्स पर भी अपनी जगह बना रहा है।

लोक वाद्ययंत्रों के जरिए गाते हैं गीत

रोशन लाल हिमाचल के उन जमीनी कलाकारों में से हैं, जो लोक वाद्ययंत्रों जैसे रणसिंघा, ढोल और नगाड़ा के मूल उपयोग पर जोर देते हैं। उनके साथियों का समूह पारंपरिक वेशभूषा, हिमाचली टोपी, ऊनी चोला और पट्टू में सजकर जब मंच पर आता है, तो दिल्ली से लेकर सुदूर पहाड़ों तक की यादें ताजा हो जाती हैं। यह गायन प्रकृति, प्रेम और देवताओं की स्तुति का मिश्रण है। नई पीढ़ी अब इन धुनों को फ्यूजन के साथ पेश कर रही है, जिससे इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है।

EDM और पॉप बीट्स के साथ मिला रहे लोकसंगीत

हिमाचल प्रदेश के लोकगीतों का आधुनिकीकरण पारंपरिक धुनों और समकालीन संगीत विधाओं के मेल से हो रहा है। इसके प्रमुख तरीके ये हैं:
फ्यूजन और इलेक्ट्रॉनिक संगीत (EDM): आधुनिक कलाकार पारंपरिक पहाड़ी लोकगीतों को Electronic Dance Music (EDM) और पॉप बीट्स के साथ मिला रहे हैं। उदाहरण के लिए, ‘Folk EDM’ और ‘Himachali Folk Fusion’ जैसे एलबम्स में पारंपरिक धुनों को नए ज़माने के साउंड सिस्टम के साथ प्रस्तुत किया गया है।

नए वाद्ययंत्रों का प्रयोग: जहाँ पारंपरिक रूप से ढोल, नगाड़ा और करनाल जैसे वाद्यों का प्रयोग होता था, अब वहाँ गिटार, सिंथेसाइजर और आधुनिक ड्रम सेट्स का उपयोग किया जा रहा है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया: यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे माध्यमों ने हिमाचली लोकगीतों को वैश्विक पहचान दी है। विक्की चौहान जैसे लोकप्रिय कलाकारों ने सैकड़ों पहाड़ी गीतों को नए स्वरूप में पेश किया है, जिन्हें अब शादियों और पार्टियों में डीजे (DJ) पर व्यापक रूप से बजाया जाता है।
मैशअप (Mashups) की लोकप्रियता: वर्तमान में कई गानों को मिलाकर ‘Himachali Mashup’ तैयार किए जा रहे हैं, जो युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
थीम और प्रस्तुति में बदलाव: यद्यपि गीतों का मूल भाव (जैसे नाटी, लामण, झूरी) वही रहता है, लेकिन उनकी प्रस्तुति को और अधिक ‘ग्लैमरस’ और पेशेवर बनाया जा रहा है ताकि वे वैश्विक दर्शकों को आकर्षित कर सकें।

गद्दी समुदाय की सांस्कृतिक विरासत सहेज रहे लोकगायक रोशनलाल

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के लोकगायक रोशन लाल हिमाचल के गद्दी समुदाय की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए जाने जाते हैं। उनका जन्म भरमौर (चंबा) में हुआ था। वे अपने परिवार की पाँचवीं पीढ़ी के कलाकार हैं और उन्होंने संगीत की शिक्षा अपने भाइयों के साथ भरमौर में अपने गुरु से प्राप्त की। वे मुख्य रूप से गद्दी लोक संगीत और भक्ति गीतों के लिए प्रसिद्ध हैं। भगवान शिव के अनन्य भक्त होने के कारण उनकी भक्ति उनके गीतों में स्पष्ट झलकती है।

रोशनलाल की पत्नी कंचन हैं सह-गायिका

वे अक्सर अपनी पत्नी कंचन के साथ जुगलबंदी में गाते हैं। कंचन ने विवाह के बाद ही रोशन लाल से गायन सीखा था। यह जोड़ी शादियों, मेलों, जागरणों और पारिवारिक उत्सवों में अपनी प्रस्तुति देती है। वे अपने पति और पूरी टीम के साथ पूरे देश में हिमाचली लोकगीत सुनाने जाती हैं।

‘खजियार चंबा’ ने बनाया लोकप्रिय

उन्हें ‘खजियार चंबा’ के लोकप्रिय कलाकार के रूप में पहचाना जाता है। उनके लोकप्रिय गीतों में “रोणका” (Ronkan) गद्दी नाटी और “चंबा वार” (Chamba Waar) शामिल हैं। उन्होंने पारंपरिक गद्दी धुनों को डिजिटल युग में लाने के लिए Anahad Foundation जैसे संस्थानों के साथ काम किया है। रोशन लाल मौखिक परंपरा के माध्यम से रामायण, महाभारत और कृष्ण लीला के प्रसंगों को लोक धुनों में गाकर अगली पीढ़ी तक पहुँचा रहे हैं। उनके अनुसार, संगीत उनके परिवार और संस्कृति को जोड़ने वाला ‘गोंद’ है।

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