देवरिया। देश में भगवान शिव के अनेक रहस्यमयी और अनोखे मंदिर हैं। इन मंदिरों की अपनी मान्यताएं और कथाएं हैं। ऐसा ही एक अनोखा मंदिर है हिमाचल के कुल्लू में बिजली महादेव का जिसका बहुत अधीक धार्मिक महत्व है। यह मंदिर कुल्लू घाटी के काशवरी गांव में स्थित है। यह मंदिर भारत के प्राचीनतम मंदिरों में से एक है। जनवरी से मार्च तक मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। सावन के पवित्र महीने में यहा मेला भी लगता है तब बिजली महादेव के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्दालु पहुंचते हैं।


यहां हर 12 साल में गिरती है बिजली
इस मंदिर की सबसे रहस्यमयी बात यह है कि इस मंदिर में हर 12 साल में बिजली गिरती है। इस लिए इस शिवलिंग को बिजली महादेव कहते हैं। मंदिर पर गिरने वाली इस बिजली ने आज तक किसी पुजारी या गांव के किसी इंसान को नुकसान नहीं पहुंचाया है। कहा जाता है बिजली गिरने से यहा स्थापित शिवलिंग टुकड़ों में बंट जाता है। जिसके बाद पुजारी मक्खन और सत्तू के सेप से सभी टुकड़ों को आपस में चिपका देते हैं। कुछ दिनों के बाद शिवलिंग वापस अपने पुराने आकार में आ जाते हैं।


बिजली महादेव से जुड़ी पौराणिक कथा
बहुत समय पहले यहां कुलांत नाम का एक दैत्य रहता था। दैत्य कुल्लू के पास की नागणधार से अजगर का रूप धारण कर मंडी की घोग्घरधार से होता हुआ लाहौल स्पीति से मथाण गांव आ गया। दैत्य रूपी अजगर कुंडली मार कर ब्यास नदी के प्रवाह को रोक कर इस जगह को पानी में डुबोना चाहता था। भगवान शिव ने त्रिशूल के प्रहार से कुलान्त का अंत कर दिया। कुलान्त के मरते ही उसका शरीर धरती के जितने हिस्से में फैला हुआ था वह पूरा की पूरा क्षेत्र पर्वत में बदल गया। कुलांत के मरने के बाद शिव ने इंद्र से कहा कि वे बारह साल में एक बार इस जगह पर बिजली गिराया करें। माना जाता है कि बिजली के रूप में शिवजी इस इलाके पर आने वाली सारी मुसीबतों को अपने ऊपर ले लेते हैं। इस तरह से हमेशा गांव पर शिवजी की कृपा बनी रहती है।