देवरिया। चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Gyanesh kumar) अब भारत के नए ‘मुख्य चुनाव आयुक्त’ (CEC)होंगे। ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के IAS अधिकारी हैं। ज्ञानेश कुमार को मंगलवार को ही मुख्य चुनाव आयुक्त की जिम्मेदरी सौंप दी गई, आज ही अब तक  मुख्य चुनाव आयुक्त रहे राजीव कुमार रिटायर हो रहे हैं।(Gyanesh kumar) ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक रहेगा। नए कानून के मुताबिक चुने गए ज्ञानेश कुमार पहले मुख्य चुनाव आयुक्त हैं।

बैठक के बाद चुने गए ज्ञानेश कुमार

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC)के लिए सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बैठक ली गई थी। बैठक में पीएम के अलावा, गृहमंत्री अमित शाह और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल थे। मुख्य चुनाव आयुक्त के लिए 5 नामों का पैनल दिया गया था जिनमें से(Gyanesh kumar) ज्ञानेश कुमार का नाम फाइनल किया गया। हालांकी राहुल गांधी ने नामों की सूची पर विचार करने से इनकार कर दिया था। बैठक में ही विवेक जोशी को चुनाव आयुक्त का पद दिया गया वहीं चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू को उनके पद पर बनाए रखना का भी फैसला किया गया।

कौन हैं ज्ञानेश कुमार?

ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के IAS अधिकारी हैं। उनका जन्म 27 जनवरी 1967 को हुआ है। उन्होंने IIT कानपुर से बीटेक किया है। ज्ञानेश कुमार केरल SC-ST डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर, गृह मंत्रालय में एडिशनल सेक्रेटरी और संसदीय कार्य मंत्रालय में में सेक्रेटरी के पद पर रह चुके हैं। ज्ञानेश कुमार UPA सरकार के दौरान रक्षा मंत्रालय में भी अपनी सेवा दे चुके हैं। ज्ञानेश कुमार को 2025 के आखिरी में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी संभालनी होगी वहीं 2026 में होने वाले बंगाल, असम और तमिलनाडु चुनाव भी ज्ञानेश कुमार संपन्न कराएंगे।

राहुल गांधी ने जताई नाराजगी

नए चुनाव आयुक्त की नियुक्त पर अपनी असहमति जताते हुए राहुल गांधी ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा- “अगले चुनाव आयुक्त को लेकर बैठक थी। इसमें मैंने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को डीसेंट नोट दिया था। इसमें लिखा था मूलभूत बात यह है कि चुनाव आयोग स्वतंत्र होता है। मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में कार्यपालिका का कोई दखल नहीं होता है।

लोकसभा का नेता विपक्ष होने के नाते मेरी जिम्मेदारी है कि बाबा साहेब अंबेडकर और देश का निर्माण करने वाले नेताओं के आदर्श कायम रहे। आधी रात में पीएम गृह मंत्री का CEC नियुक्त करने का फैसला अपमानजनक है। CEC की नियुक्ति का फैसला तब लिया गया जब मामला सुप्रीम कोर्ट में है और इसपर 48 घंटे में सुनवाई होनी है।”