देवरिया। यह हर वर्ष की परंपरा है। बजट से पहले राष्ट्रपति महोदया दही-चीनी से वित्त मंत्री जी का मुंह मीठा कराती हैं, शुभकामनाएं देती हैं। माननीय राष्ट्रपति महोदया ने जब से पद को सुशोभित किया है, मुझे इस तस्वीर की प्रतीक्षा रहती है। ये पंक्ति याद आती है- एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों…

लड़कियों और महिलाओं के लिए ये तस्वीरें प्रेरणा हैं। पार्टी, सरकार, व्यवस्था से परे दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश का बजट पेश हो रहा है, माता सरस्वती से विद्या और मां लक्ष्मी से समृद्धि मांगने वाले देश में दो महिलाएं इसकी महत्वपूर्ण कड़ी बनती हैं। पूरी टीम को लीड करती हैं। ये तस्वीरें अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंचनी चाहिए। बेटियां किताबों और कलम के साथ बड़ी होनी चाहिए।

यह परंपरा हर वर्ष आशा और विश्वास से भरती है। मैं उम्मीद के साथ लिखती हूं। कोई एक परिवार भी अगर इन तस्वीरों से या मेरे लिखने से नए सिरे से सोचता है, तो मेरे लिखने का और इन तस्वीरों का होना सफल।