देवरिया। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में किसान नेता भाजपा की कृषि नीतियों के खिलाफ बुधवार को जमकर बरसे। उन्होंने कहा, इस लोकसभा चुनाव में भाजपा को 159 सीटों पर किसानों ने हराया है। अगर केंद्र सरकार ने अपनी कृषि नीति नहीं बदली तो फिर हारेगी। किसान नेताओं ने कहा- भाजपा को यह समझना चाहिए कि सत्तारूढ़ गठबंधन को 5 राज्यों में 38 ग्रामीण लोकसभा सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है, जहां किसान आंदोलन मजबूत था। यह लंबे चले आ रहे कृषि संकट का परिणाम है। देवरिया के कई सामाजिक समूहों ने मिलकर सलेमपुर सांसद रमाशंकर राजभर को 14 सूत्रीय तात्कालिक और 8 सूत्रीय नीतिगत मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। इन समूहों में संयुक्त किसान मोर्चा देवरिया, अखिल भारतीय किसान सभा, उ.प्र.किसान सभा, चीनी मिल चलाओ संघर्ष समिति, भारतीय किसान यूनियन, क्रांतिकारी किसान सभा, खेत मजदूर-किसान मंच, समान शिक्षा आंदोलन, उत्तर प्रद्रेश शामिल थे। इस दौरान वक्ताओं ने सांसद राजभर को से कहा कि किसानों और खेत मजदूरों के पक्ष में खड़े रहकर प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल पर लंबित मांगों पर तत्काल और सार्थक कार्रवाई करने का दबाव डालें। किसानों ने कहा कि – NDA-2 सरकार को SKM और केन्द्र सरकार के बीच 9 दिसंबर 2021 को हुए समझौते के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार ठहराया गया, जिसमें हमारी लंबे समय से लंबित मांग जैसे कि लाभकारी और गारंटीकृत एमएसपी के साथ खरीद, व्यापक ऋण माफी, बिजली के निजीकरण को निरस्त करना आदि शामिल हैं।”


संयुक्त किसान मोर्चा फिर आंदोलन करने की तैयारी में

किसान मोर्चा का कहना है कि- “ वर्तमान में भारत के मेहनतकश नागरिक कर्ज, बेरोजगारी और महंगाई जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। भारत में प्रतिदिन 31 किसान आत्महत्या कर रहे हैं। तीव्र कृषि संकट, किसानों की आत्महत्या, ग्रामीण से शहरी संकट पलायन और बढ़ती आय और धन असमानता को हल करने के लिए नीतियों में बदलाव आवश्यक है।” इन सब कारणों की वजह से संयुक्त किसान मोर्चा ने कॉर्पोरेट समर्थक नीतियों में बदलाव, 9 दिसंबर 2021 के समझौते को लागू करने समेत प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन को फिर से शुरू करने का फैसला लिया है।


किसान मजदूर नेताओं में ये रहे मौजूद

ज्ञापन सौंपने वाले किसान मजदूर नेताओं में अ.भा.किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव का. साधुशरण, चीनी मिल चलाओ संघर्ष समिति के ब्रजेंद्र मणि त्रिपाठी,उत्तर प्रदेश किसान सभ के प्रदेश सचिव आनंद चौरसिया, समान शिक्षा आंदोलन उत्तर प्रदेश के डॉ.चतुरानन ओझा, भारतीय किसान यूनियन पूर्वी उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष विनय सिंह सैथवार, पं.वेदप्रकाश, गिरीश नारायण शाही, जिलाध्यक्ष (भाकियू), क्रांतिकारी किसान सभा के विकास दुबे, खेत मजदूर किसान मंच के राजेश आज़ाद, कामरेड रमाशंकर गुप्ता मौजूद रहे।