देवरिया। ज्ञानवापी पर ASI की सर्वे रिपोर्ट सामने आ गई है। जिला जज की अदालत के आदेश पर सर्वे रिपोर्ट गुरुवार को सभी पक्षकारों को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मस्जिद वाली जगह पर पहले भव्य बड़ा हिंदू मंदिर होने की सबूत मिले हैं। एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि वर्तमान ढांचे यानी मस्जिद के पहले यहां हिंदू मंदिर हुआ करता था। नए ढांचों में जो खंभे लगाए गए हैं, वो पुराने मंदिरों के खंभों को ही थोड़ा बदलकर इस्तेमाल किए गए हैं। सर्वे में हिंदू मंदिर होने के और भी कई अहम सबूत मिले हैं।


पश्चिमी दीवार बड़े हिंदू मंदिर का हिस्सा
सर्वे रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मस्जिद की पश्चिमी दीवार बड़े हिंदू मंदिर का हिस्सा है। पिलर में हुई नक्काशी भी हिंदू मंदिर का हिस्सा होने का प्रमाण देती है जिसे मिटाने की कोशिश की गई है। बताया जा रहा है कि ज्ञानवापी में अयोध्या से भी ज्यादा सबूत मिल हैं। अयोध्या में मंदिर को पूरी तरह से नष्ट करके मस्जिद का निर्माण कराया गया था इसलिए साक्ष्य जुटाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। ज्ञानवापी के सर्वे रिपोर्ट में पर्याप्त सबूत हैं जो अदालत में मंदिर के हिस्से में मस्जिद बनाए जाने को प्रमाणित कर सकता है।


मौजूदा ढांचे से मिले 34 शिलालेख
ASI को मौजूदा ढांचे में 34 शिलालेख मिले हैं, जिनमें से 32 शिलालेखों की प्रतिकृतियां बनवाई गई हैं। ये शिलालेख देवनागरी, तेलगु और कन्नड़ भाषा में लिखे गए हैं। इन शिलालेखों में देवी-देवताओं के नाम जैसे जनार्दन, रुद्र और उमेश्वर लिखे हुए थे। साथ ही इसमें महा-मुक्तिमंडप जैसे संस्कृत शब्दों का भी उपयोग किया गया है। साथ ही अरबी और फारसी में लिखे शिलालेख भी मिले हैं जिसमें मस्जिद का निर्माण औरंगजेब के शासनकाल में कराए जाने की बात मिली है।


हिंदू देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां मिली
मस्जिद के तहखाने में फेंकी गई मिट्टी के नीचे कई हिंदू देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां पाई गई हैं। जिनमें गणेश जी, बजरंगबली, और शिवलिंग के अवशेष हैं। साथ ही नक्काशीदार वास्तुशिल्प भी पाए गए हैं। ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार टेक्नोलॉजी के उपयोग पर एएसआई ने बताया कि उत्तरी हॉल में जीपीआर सर्वेक्षण से संकेत मिलता है कि उत्तरी दरवाजे की ओर फर्श में एक गुफानुमा आकृति थी। दक्षिण गलियारे में तहखाने के स्तर की ओर एक आयताकार मार्ग भी था। गलियारों से सटे हुए चौड़े तहखानेभी पाए गए हैं। एक तहखाने में 2 मीटर चौड़ा कुआं भी मिला है, जिसे ढंक दिया गया है।


अभी भी 1991 के पूजा स्थल कानून से गुजरना होगा
सर्वे में मिले साक्ष्य को अभी कोर्ट की प्रक्रिया से गुजरना होगा। मंदिर के साक्ष्य मिलने के बाद भी अभी मामले को 1991 के पूजा स्थल कानून के दांव-पेंचों पर खरा उतरना होगा। 1991 में आए पूजा स्थल कानून को कांग्रेस की नरसिम्हा राव सरकार ने लाया था। इस कानून को मंदिर आंदोलन के दौर में मंदिर-मस्जिद के लिए बढ़ रहे विवाद पर लगाम लगाने के लिए लाया गया था।


क्या है ज्ञानवापी परिसर का पूरा विवाद
हिन्दू पक्ष का दावा है कि वाराणसी स्थित ज्ञानवापी परिसर के नीचे 100 फीट ऊंचा आदि विश्वेश्वर का स्वयंभू ज्योतिर्लिंग है। मंदिर को तोड़कर ही उस स्थान पर मस्जिद का निर्माण कराया गया था। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि ज्ञानवापी परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर यह पता लगाया जाए कि जमीन के अंदर का भाग मंदिर का अवशेष है या नहीं। साथ ही विवादित ढांचे की फर्श तोड़कर ये भी पता लगाया जाए कि 100 फीट ऊंचा ज्योतिर्लिंग स्वयंभू विश्वेश्वरनाथ भी वहां मौजूद हैं या नहीं। मस्जिद की दीवारों की भी जांच कर पता लगाया जाए कि ये मंदिर कि हैं या नहीं। याचिकाकर्ता का दावा है कि काशी विश्वनाथ मंदिर के अवशेषों से ही ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण हुआ था। इसी मामले की सुनवाई करने के बाद कोर्ट ने ASI सर्वे कराने का आदेश दिया था।