देवरिया। मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में गीता-सार, रामचरितमानस और महाभारत जैसे पवित्र धार्मिक ग्रंथों के प्रसंगों को पढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि रामचरितमानस जैसे ग्रंथ हमारे पाथेय और मार्गदर्शक हैं। रामचरितमानस सहित गीता और महाभारत के प्रसंगों को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। यह प्रसंग नैतिक शिक्षा और अध्यात्म की शिक्षा में सहायक होंगे। ज्ञान का सर्वश्रेष्ठ प्रकटीकरण अपनी मातृभाषा में होता है।
मातृभाषा में शिक्षा को प्रोत्साहित किया जाएगा
सीएम शिवराज ने कहा कि अंग्रेजी के आधिपत्य को समाप्त कर मातृभाषा में शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार हरसंभव प्रयास करेगी। इसी दिशा में मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिन्दी में कराने की पहल की गई है।
‘श्रीराम भारत की पहचान हैं’
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा है कि राम हमारे रोम-रोम में बसे हैं। हमारा अस्तित्व और प्राण भी राम हैं। श्रीराम भारत की पहचान हैं। भगवान श्रीराम और तुलसीदास बच्चों की पुस्तकों में पढ़ाये जायेंगे। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि उज्जैन में श्री महाकाल महालोक की तर्ज पर ओरछा में रामराजा लोक और चित्रकूट में वनवासी रामलोक का निर्माण किया जायेगा। साथ ही राज्य सरकार राम-वन-गमन पथ पर भी काम करेगी। ओरछा को अयोध्या से जोड़ा जायेगा।