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इंडोनेशिया में शुरु हुई पर्यावरण बचाव की अनोखी मुहीम, बच्चों को ग्रेजुएट होने के लिए पेड़ लगाना जरूरी

देवरिया। दुनिया के सबसे बड़े इस्लामिक देश इंडोनेशिया में पर्यावरण बचाने के लिए इको इस्लाम आंदोलन चलाए जा रहे हैं। इस आंदोलन को वहां के मौलवी चला रह हैं। मौलवी पर्यावरण प्रचारक बन गए हैं और उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की मुहिम चलाई है। वे लोगों को बता रहे हैं कि कैसे मोहम्मद साहब खुद भी पेड़ लगाते थे और जानवरों को बचाने की कोशिश करते थे। इंडोनेशिया की एक हजार मस्जिदों में सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। मौलवी खुद ही स्मार्ट एनर्जी मीटर भी लगवा रहे हैं और मस्जिदों में वेस्ट रिसाइकिल करने की व्यवस्था भी की जा रही है। यहां तक कि पर्यावरण बचाने के लिए फतवे तक जारी किए जा रहे हैं।


स्कूलों में दी जा रही पर्यावरण संरक्षण की ट्रेनिंग
पर्यावरण संरक्षण की इस मुहीम को स्कूलों के माध्यम से बच्चों तक भी पहुंचाया जा रहा है और उन्हें भी इस आंदोलन का हिस्सा बनाया जा रहा है। ताकी भविष्य में भी ये बच्चे इस आंदोलन को जिंदा रख सकें। इंडोनेशिया के मस्जिदों द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों में करीब 40 लाख बच्चे पढ़ते हैं। उन्हें पर्यावरण संरक्षण की ट्रेनिंग दी जा रही है। यहां तक कि ग्रेजुएट होने के लिए पेड़ लगाना अनिवार्य है। बिना पेड़ लगाए डिग्री ही जारी नहीं होगी।


पर्यावरण में हो रहे बदलाव से मिल रहे खतरनाक परिणाम
दुनिया भर में बढ़ रहे प्रदूषण की वजह से तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा इंडोनेशिया भुगत रहा है। हर साल 10 इंच जमीन समुद्र निगल रहा है। राजधानी जकार्ता से गुजरने वाली 13 नदियों में बाढ़ के हालात दिनोदिन भयंकर होते जा रहे हैं। शहर का बड़ा हिस्सा पानी में डूबा रह रहा रहा है। 2020 में आई बाढ़ में हजारों जानें चली गई थीं। 4 लाख लोग पलायन को मजबूर हुए थे। वर्ल्ड बैंक ने आशंका जताई है कि इस दशक के अंत तक 42 लाख इंडोनेशियाइयों को बाढ़ की वजह से पलायन करना पड़ेगा।

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