देवरिया।भारत तरह-तरह की संस्कृति, रीति-रिवाजों, परंपराओं और त्योहारों का देश है। यहां पर जैसे कदम-कदम पर खान-पान और भाषा-बोली बदल जाती है, वैसे ही स्थान के साथ-साथ त्योहारों को मनाने का तरीका भी बदल जाता है। 24 अक्टूबर को जहां देशभर में विजयदशमी यानी कि दशहरे का त्योहार मनाया जाएगा और रावण दहन किया जाएगावहीं हिमाचल के कुल्लू में अनोखी परंपरा निभाई जाती है। कुल्लू का दशहरा दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। यहां विजयादशमी के दिन रावण दहन नहीं किया जाता है।


दशमी तिथि को शुरू होता है दशहरे का 7 दिनों का पर्व
कुल्लू में मनाए जाने वाला यह पर्व दशमी तिथि यानी की दशहरे के दिन ही शुरू होता है और अगले सात दिनों तक चलता है। ऐसा माना जाता है कि इस आयोजन में शामिल होने स्वर्गलोग से देवी देवता आते हैं। कुल्लू के धौलपुर मैदान में उत्सव का आयोजन होता है। उत्सव की अध्यक्षता भगवान रघुनाथ करते हैं।लोग देवी-देवताओं के रथ को खींचते हुए, ढोल-नगाड़े बजाते हुए मेले मे आते हैं। ऐसा माना जाता है कि पहले दिन कुल्लू की देवी हिडिंबा देवी पधारती हैं, उन्हें दशहरे की देवी भी माना जाता है। इसलिए इस दिन राजघराने के सभी सदस्य देवी हिडिंबा से आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। आसपास के गांव वाले भी अपने-अपने देवी देवताओं को लेकर मेले में पहुंचते हैं। इस बार भी देवी-देवताओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया है।

इस साल 25 से 30 अक्टूबर तक चलेगा उत्सव
इस बार राज्य सरकार ने इस आयोजन को और भी भव्य बनाने की योजना बनाई है। इन अनोखे दशहरे को अंतराराष्ट्री य स्त रपर पहचान दिलाने के लिए इस साल रूस, इस्राइल, रोमानिया, कजाकिस्तान, क्रोएशिया, वियतनाम, ताइवान, थाईलैंड, पनामा, ईरान, मालदीव, मलेशिया, कीनिया, दक्षिण सूडान, जाम्बिया, घाना और इथियोपिया सहित 19 देशों के कलाकर भी शामिल होंगे।