देवरिया। भारत विविधता से भरा देश है, यहां मनाए जाने वाले तरह-तरह के त्योहारों की वजह से इसे त्योहारों का देश भी कहा जाता है। भारत में एक ही त्योहारों को अलग-अलग तरह से मनाए जाते हैं। दशहरे के त्योहारों को भी कई तरह से मनाया जाता है। आइए जानते हैं देश में कुछ खास तरह से मनाए जाने वाले विजयादशमी के बारे में।


कुल्लु का दशहरा
हिमाचल के कुल्लु का दशहरा अपने आप में अनोखा दशहरा है। यहां किसी तरह का रावण दहन नहीं होता है। यहां पर राजा ने कुष्ठ से उबरने पर दशहरा मनाने की घोषणा की थी। मान्यता है उस उत्सव में 365 देवी और देवता शामिल हुए थे। इसे देवताओं का कुंभ भी कहा जाता है। दशहरे के दिन यहां रघुनाथ भगवान की रथयात्रा निकाली जातीहै। कहते हैं रथ के पीछे सभी देवी-देवता चलते हैं। यहां के दशहरे को देव मिलन कहा जाता है। इसे देखने के लिए देश विदेश से पर्यटक आते हैं।


मैसूर का दशहरा
कर्नाटक के मैसूर का दशहरा सबसे भव्य दशहरों में से एक है। यहां भी दशहरे में रावण दहन नहीं होता है। यहां दशहरे में सांस्कृतिक कार्यक्रम खेल-कूद, गोम्बे हब्बा, जम्बो सवारी जैसे आयोजन किए जाते हैं। दशहरा यहां नौरात्री के पहले दिन से शुरु हो जाता है। विजयादशमी के दिन सोने-चांदी से सजे हाथियों की सवारी महल से निकाली जाती है। इस काफिले को 21 तोपों की सलामी भी दी जाती है।
महल से निकलकर काफिला 6 किलोमीटर चलकर बन्नी मंडप तक जाता है। सवारी में शामिल हाथी की पीठ पर 750 किलो सोने सिंहासन रखा होता है। इस सिंहासन पर माता चामुंडेश्वरी की मूर्ति विराजित होती है। इस सिंहासन को अम्बारी कहते हैं। पहले इस सिंहासन पर मैसूर के राजा बैठकर अपना काफिला निकालते थे। 1971 में राजशाही खत्म होन के बाद इस पर माता को बैठाया जाने लगा।


बस्तर दशहरा
छत्तीसगढ़ के बस्तर में मनाया जाने वाला दशहरा दुनिया का सबसे लंबा त्योहार है। 600 साल पुरानी परंपरा के अनुसार यहां दशहरा 75 दिनों तक चलने वाला त्योहार है। लेकिन बस्तर में भी दशहरे पर रावण दहन नहीं होता है। यह दशहरा कई चरणों में अलग-अलग रिवाजों को निभाते हुए मनाया जाता है। यहां 6 साल की बच्ची को काछन देवी का रूप माना जाता है। काछन देवी ही दशहरा मनाने की अनुमति देती है। बस्तर में भी विजयादशमी के दिन राजा की सवारी निकाली जाती है। इस दिन राजा अपनी प्रजा की समस्याओं को सुनने के लिए दरबार भी लगाते हैं जिसे मुड़िया दरबार कहा जाता है।


मैंगलोर का दशहरा
मैंगलोर का दशहरा भी विश्व प्रसिद्ध दशहरों में से एक है। दशहरे पर यहां रथोत्सव निकाली जाती है। इस दौरान मंगलोर के गली, रोड, दुकाने और मकान सभी जगमगाती लाइट्स से सजे होते हैं। दशहरे पर यहां का टाइगर डांस मशहूर है। साथ ही शोभा यात्रा का बैंड, चेंडे, लोक नृत्य, यक्षगान पात्र, हुली वेशार, डोलू कुनिथा और गुड़ियों का प्रदर्शन भी होता है। यह शोभा यात्रा विजयादशमी की शाम को गोकर्णनाथेश्वर मंदिर स शुरू होता है और अगले दिन सुबह-सुबह मंदिर परिसर के भीतर पुष्करिणी तालाब में मूर्तियों के विसर्जन के साथ समाप्त होती है।


विजयवाड़ा
आंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा में मनाया जाने वाला दशहरा भी अपने आप में अनोखा है। कृष्णा नदी के किनारे बने श्री कनका दुर्गा मंदिर से दशहरे की शुरुआत होती है। यहां दशहरा 10दिनों तक मनाय जाता है। कनक दुर्गा देवी को दस दिनों तक अलग-अलग अवतारों में सजाया जाता है। वहीं विजयवाड़ा कनक दुर्गा मंदिर को भी खास तरह से सजाया जात है। यहां दशहरा पर मां सरस्वती की विशेष पूजा होती है। विजयादशमी के दिन लोग कृष्णा नदी में नहाने भी आते हैं।