देवरिया। जिला न्यायपालिका में दो-दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की बातों का संज्ञान लिया गया उन्होंने कहा था कि – “त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए अदालतों में ‘स्थगन की संस्कृति’ को बदलने के प्रयास किए जाने की जरूरत है”। राष्ट्रपति की चिन्ता ऐसे समय में आई है जब कलकत्ता में एक डॉक्टर के बलात्कार के बाद निर्मम हत्या कर दी गई।


“देर से न्याय अर्थ खो देता है”
त्वरित न्याय से मतलब अपराधी को जितनी जल्दी हो न्याय मिल सके। न्याय में देरी भी अन्याय की तरह है। देर से मिला न्याय अपना अर्थ खो देता है। अदालतों में लंबित न्यायालयों पर नजर डालें तो 2022 में पूरे भारत में लंबित मामले बढ़कर 5 करोड़ हो गए हैं। जिला और उच्च न्यायालयों में 30 से भी अधिक वर्षों से लंबित 169,000 मामले शामिल हैं। दिसंबर 2022 तक 5 करोड़ मामलों में से 4.3 करोड़ यानी 85 फीसदी से अधिक मामले सिर्फ जिला न्यायालयों में लंबित हैं। सरकार स्वयं सबसे बड़ी वादी है, जहां 50 प्रतिशत लंबित मामले सिर्फ राज्यों द्वारा प्रायोजित हैं। हमारे देश में दुनिया के सबसे अधिक अदालती मामले लंबित हैं।


न्याय में देरी पीड़ित और आरोपी दोनों के लिए सही नहीं

2018 के नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, हमारी अदालतों में मामलों को तत्कालीन दर पर निपटाने में 324 साल से अधिक समय लगेगा। अदालतों में देरी होने से पीड़ित और आरोपी दोनों को न्याय दिलाने में देरी होती है। अप्रैल 2022 में बिहार राज्य की एक अदालत ने 28 साल जेल में बिताने के बाद, सबूतों के अभाव में, हत्या के एक आरोपी को बरी कर दिया था। उसे 28 साल की उम्र में गिरफ्तार किया गया था, 58 साल की उम्र में रिहा किया गया। अदालतों में लंबित मामलों के कारण सकल घरेलू उत्पाद भी प्रभावित होता है. एक अनुमान के अनुसार अदालतों में लंबित मामलों के कारण भारत के सकल घरेलू उत्पाद को 1.5 -2 तक का घाटा होता है।


लंबित मामलों से बढ़ते हैं अपराधियों के हौसले
न्यायालयों में मामलों के लंबित रहने से अपराधियों के हौसले बढ़ जाते हैं। उनमें न्यायालच का कोई जर नहीं रहता है। न्यायालयों को त्वरित न्याय के लिए अहम् कदम उठाने की जरूरत है. समय से अपराधी को सजा मिलने पर लोगों में न्याय के प्रति निष्ठा बढती है एवं अपराधियों में डर का माहौल निर्मित होता है। त्वरित न्याय अपराधियों के मन में कानून के प्रति भय पैदा करता है, जिससे वे अपराध करने से पहले कई बार सोचते हैं। इसके साथ ही यह अपराध दर को कम करने में सहायक हो सकता है। जब न्याय त्वरित होता है, तो समाज में असंतोष और तनाव कम होते हैं, जिससे शांति और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलती है।

लेखक
डॉ. उमेश कुमार

जनसंचार एवं नवीन मीडिया विभाग, जम्मू केन्द्रीय विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।