देवरिया। गुरुवार 15 जनवरी को देवरिया के सभी सरकारी दफ्तर, स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे। उत्तर प्रदेश सरकार ने मकर संक्रांति के अवसर पर 15 जनवरी को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया है (Deoria Makar Sankranti Holiday)। इस संबंध में शासन ने आदेश भी जारी कर दिया है। शासनादेश में बताया गया है कि शासन स्तर पर विचार-विमर्श के बाद मकर संक्रांति पर छुट्टी किए जाने का फैसला किया गया है। इससे पहले जारी प्रदेश की अवकाश तालिका में 15 जनवरी को मकर संक्रांति पर छुट्टी का प्रावधान नहीं था। दरअसल, संक्रांति 15 जनवरी को इसलिए मनाई जा रही है क्योंकि इस वर्ष सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की दोपहर के बाद हो रहा है। इस वजह से उदया तिथि के अनुसार, मुख्य स्नान-दान और उत्सव 15 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा।
अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग दिन है सार्वजनिक छुट्टी
उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली-एनसीआर और गुजरात में मकर संक्रांति पर 15 जनवरी को छुट्टी रहेगी। जबकि हरियाणा में 13 और 14 जनवरी को सार्वजनिक अवकाश है। 13 जनवरी को लोहड़ी और 14 जनवरी को मकर संक्रांति की छुट्टी की गई है। जबकि पंजाब में भी 13 और 14 जनवरी की छुट्टी घोषित है। 13 जनवरी को लोहड़ी और 14 जनवरी को माघी के अवसर पर दो दिन की छुट्टी है। वहीं तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में 14 और 15 जनवरी को भोगी और पोंगल/संक्रांति के उपलक्ष्य में स्कूलों में बहु-दिवसीय अवकाश रहता है।
इस दिन से दिन लंबे और रात छोटी होनी शुरू हो जाती है
Encyclopedia Britannica के अनुसार, मकर संक्रांति एक प्राचीन हिन्दू पर्व है जिसका मूल सौर ज्योतिष (solar astrology) से जुड़ा है। यह त्योहार हर वर्ष लगभग 14 जनवरी को मनाया जाता है जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि (Capricorn) में प्रवेश करता है। इस खगोलीय बदलाव को उत्तरायण कहा जाता है। यानी सूर्य की दक्षिण से उत्तर की ओर गति आरंभ होना, जो कि प्रकृति में दिन के लंबे और रात के छोटे होने का संकेत है। यह पर्व न केवल हिन्दू धर्मग्रंथों और खगोलीय गणनाओं से जुड़ा है, बल्कि इसका उल्लेख महाभारत जैसे प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है, जहां भगवान भीष्म की उत्तरायण की समाप्ति के समय देहत्याग की कथा से इसका दार्शनिक और आध्यात्मिक महत्व समझाया गया है। इस दिन लोग सूर्य देव की पूजा, पवित्र नदियों में स्नान, और दान जैसी परंपराओं का पालन करते हैं, जिससे जीवन में नए आरंभ, पवित्रता और कृतज्ञता का भाव पैदा होता है।
दिवाली या होली नहीं, मकर संक्रांति है देश का सबसे बड़ा पर्व
भारत में मकर संक्रांति का सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व अत्यंत व्यापक है। यह पर्व देश के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न नामों और स्थानीय परंपराओं के साथ मनाया जाता है- जैसे तमिलनाडु में पोंगल, पंजाब में लोहड़ी, असम में माघ बिहू और उत्तर भारत में खिचड़ी/माघी आदि। कृषि प्रधान समाज में यह त्योहार सर्दियों की फसल कटाई के बाद की ख़ुशी तथा अगली फसल के लिए आभार व्यक्त करने का अवसर भी है, जिसमें परिवार और समुदाय मिलकर विशेष व्यंजन बनाते हैं, जैसे तिल और गुड़ से बने पकवान, पतंग उड़ाना, मेलों में भाग लेना आदि।
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