देवरिया: उत्तर प्रदेश के देवरिया शहर में अब्दुल शाह गनी मजार के अवैध घोषित किए जाने के बाद प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए मेले की तैयारी की जा रही थी। प्रदेश भर से लोगों को बुलाया गया था। बड़ी संख्या में लोगों के यहां पहुंचने के बाद प्रशासन के लिए सरकारी जमीन कब्जा कर बनाई गई मजार को तोड़ना मुश्किल होता। बताया जा रहा है कि इस बार प्रदेश के दूसरे जिलों से भी लोगों को बुलाकर दबाव बनाने की तैयारी थी। इसके लिए बकायदा अनुमति तक ले ली गई थी। बाद में योजना का पता चलने के बाद प्रशासन ने अनुमति कैंसिल की और उर्स पर रोक लगाई। -Deoria Illegal Mazar Demolition
विधायक ने कहा- मुकदमा कर जेल भेजेंगे
सदर विधायक शलभमणि त्रिपाठी ने कहा कि अरबों रुपए की सरकारी जमीन पर कागजों में हेरफेर करके कब्जा किया गया था। इस कब्जे के खिलाफ ही शिकायत की थी और जांच में अवैध पाए जाने पर ही प्रशासन ने मजार तोड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि दस्तावेजों में हेरफेर कर जमीन कब्जा करने वालों और उसमें उनकी मदद करने वालों पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई होनी चाहिए।
300 की पुलिस फोर्स बुलाकर मजार तोड़ी
गौरतलब है कि गोरखपुर ओवरब्रिज के पास बनी अवैध मजार को प्रशासन तब तोड़ पाया जब 6 थानों की 300 पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची। कोर्ट के आदेश पर 3 बुल्डोजर लेकर कार्रवाई करने पहुंचा प्रशासन तब तक कुछ नहीं कर सका, जब तक मौके पर पुलिस फोर्स ने मोर्चा नहीं ले लिया। फोर्स के पूरी तरह तैयार होने के बाद 50 साल पुरानी अवैध मजार पर बुल्डोजर चलने शुरू हुए। कोर्ट के आदेश पर रविवार को यह कार्रवाई हुई थी।
एसडीएम कोर्ट के आदेश पर हुई थी कार्रवाई
सदर भाजपा विधायक शलभ मणि त्रिपाठी के मजार के सरकारी जमीन कब्जाकर बनाए होने की शिकायत के बाद जांच हुई थी। इसमें पाया गया कि मजार सरकारी जमीन पर बनाई गई थी। योगी सरकार की सख्ती के बाद हरकत में आए देवरिया प्रशासन की देखरेख में अवैध मजार से कब्जा हटाया गया। कार्रवाई के डर से मजार कमेटी ने खुद ही सामान हटाना शुरू कर दिया था। तोड़ने से पहले प्रशासन ने परिसर को खाली कराया।
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