Deoria illegal mazar demolition sparks political protestदेवरिया में अवैध मजार ध्वस्तीकरण के विरोध में उठी राजनीतिक आवाजें, भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुई कार्रवाई

देवरिया। उत्तर प्रदेश के देवरिया शहर में 50 साल पुरानी अब्दुल शाह गनी मजार पर बुल्डोजर चलने का विरोध शुरू हो गया है। समान शिक्षा आंदोलन, उत्तर प्रदेश के सहसंयोजक डॉ चतुरानन ओझा ने सूफी मजार तोड़ने को भाजपा का सांप्रदायिक एजेंडा बताया है। उन्होंने कहा कि देवरिया के सूफी मजार को ध्वस्त किया जाना बेहद ही कायरता पूर्ण और पक्षपात पूर्ण कार्रवाई है। प्रशासन ने स्थानीय विधायक शलभ मणि त्रिपाठी के सांप्रदायिक एजेंडे को स्थापित करने के लिए जितने त्वरित गति से मजार ध्वस्त करने की कार्रवाई की है, वह हर स्तर पर निंदनीय है।

मुसलमानों से ज्यादा हिंदू जाते थे वहां

डॉ ओझा कहते हैं- जाहिर है मजार कोई मंदिर या मस्जिद नहीं होता। उसमें हिंदू मुस्लिम सभी की आस्था होती है। उसमें मुसलमानों से ज्यादा तो हिंदू मन्नत मांगने जाते थे। जाहिर है कोई कट्टर धर्मानुयायी वहां नहीं जाता। वह मजार शहर से बाहर निहायत ही उपेक्षित जगह पर श्रद्धालुओं की आस्था के आधार पर निर्मित हुई है। अब्दुल शाह गनी मजार देवरिया की पहचान है।

अस्पताल-रोजगार के लिए काम न करने वाले भाजपा विधायक को शर्म आनी चाहिए

डॉ. ओझा कहते हैं- देवरिया के लगभग सभी चौराहों पर सड़कों का अतिक्रमण करके मंदिर बने हुए हैं जो सबके संज्ञान में हैं। उनसे सार्वजनिक यातायात बुरी तरह प्रभावित होता है। जिन पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है। स्कूलों, अस्पतालों और रोजगार देने वाले संस्थानों की बदहाली के खिलाफ उनकी बेहतरी के लिए कोई कार्रवाई नहीं करने वाले विधायक को शर्म आनी चाहिए। देवरिया के इस मजार को ध्वस्त करने की कार्रवाई तत्काल रोकी जानी चाहिए।

45 साल से मजार पर लग रहा था मेला

गौरतलब है कि 45 साल से अब्दुल शाह गनी मजार पर हो रहे आयोजन को पहले ही रद्द कर दिया गया था। प्रशासन के मुताबिक, यह कार्रवाई पूरी तरह न्यायालय के आदेश के अनुसार की जा रही है। अब्दुल शाह गनी मजार गोरखपुर रोड ओवरब्रिज से सटी हुई जगह पर बनी है। मजार की पहली बार शिकायत साल 2019 में तत्कालीन जिलाधिकारी से की गई थी। उस समय भी डीएम ने आरबीओ जेई, तहसीलदार, लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को मौका मुआयना करने और प्रभावी कार्रवाई का निर्देश दिया था। इस बार भाजपा सदर विधायक शलभ मणि त्रिपाठी की शिकायत पर जांच के बाद SDM Court के आदेश पर कार्रवाई की गई थी।

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