देवरिया।मां दुर्गा की आराधना के पवित्र 9 दिन यानी शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर से शुरूहोंगे।नवरात्रि के 9 दिन माता के अलग-अलग 9 रूपों की पूजा होती है। इन नौ दिनों को बेहद शुभ माना जाता है। हर बार नवरात्री में कई शुभ संयोग बनते हैं जिनका अपना धार्मिक महत्व होता है। आइए जानते हैं आने वाली नवरात्रि में क्या खास होगा और इस बार मां शारदा किस पर सवार होकर आ रही हैं।


नवरात्री में 30 साल बाद बन रहा यह संयोग
ज्योतिष विशेषज्ञों की दी गई जानकारी के अनुसार इस बार नवरात्रि का शुभारंभ चित्रा नक्षत्र, बुधादित्य और वैधृति योग में हो रहा है। नवरात्री के शुरू होने का यह शुभ संयोग पूरे 30 सालों के बाद बन रहा है। माता रानी इसबार भी पिछली बार की तरह ही हाथी पर सवार होकर आएंगी। हाथी या गज को सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इसबार भी मां अपने साथ सुख-समृद्धि और संपन्नता लेकर आने वाली हैं। ऐसा संयोग लगातार दूसरी बार बन रहा है कि माता गज पर सवार होकर पधार रही हैं।


माता की सवारी हाथी होने का क्या है अर्थ
माता की सवारी हाथी के होना बेदह शुभ संकेत देते है, ऐसा इसलिए क्योंकि, हाथी का सीधा संबंध प्रथम पूज्य श्री गणेश और मां लक्ष्मी से है। ऐसा माना जाता है कि गणेश पर सवार होकर माता पूरे वर्ष के लिए सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य लेकर आती हैं। गणपति बप्पा को हर मांगलिक कार्य में पूजा जाता है इसलिए इस वर्ष शुभ और मांगलिक कार्यों के ज्यादा होने की संभावना रहेगी। साथ में मां लक्ष्मी के होने के कारण अन्न और धन संपन्नता भी साथ आने वाली है। माता की सवारी गज का होना इस बात का भी संकेत देता है कि इस साल वर्षा भी पर्याप्त मात्रा में होगी। इन नौ दिनों में मां की आराधना सच्चे और साफ मन से करने पर मां दुर्गा के साथ ही उनके साथ आए गणपति और मां लक्ष्मी का भी आशीर्वाद प्राप्त होगा।

मां की सवारी के अनुसार होती है भविष्य की गणना
देवी भागवत और अन्य शास्त्रों में किए गए उल्लेख के अनुसार पितृमोक्ष अमावस्या पर जब पितृगण विदा होकर धरती से वापस लौटते हैं, तबमां दुर्गा अपने गणों के साथ पृथ्वी पर विचरण के लिए आती हैं। वैसे तो शेर माता की स्थाई सवारी है लेकिन धरती पर आने वाले दिन के अनुसार हर साल मां, अलग-अलग वाहनों की सवारी करती हैं। माता की किस सवारी पर आ रही हैं इस पर भविष्य की बहुत सी घटनाएं निर्भर करती हैं। ज्योतिष, मां की सवारी को देखकर भविष्य में होने वाली बहुत सी घटनाओं का अनुमान लगाते हैं। अगर माता रविवार या सोमवार के दिन पधारती हैं तो उनका वाहन हाथी ही होता है जो की सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। इस बार भी नवरात्री रविवार को ही शुरू हो रही है इससे पता चलता है कि माता हाथी पर सवार होकर आ रही हैं।माता की विदाई 23 अक्टूबर सोमवार को होगी, इस दिन रवि योग होने से यह दिन भी शुभकारी होगा।

माता के पधारने के दिन के अनुसार तय होती है सवारी
शास्त्रों में माता की अलग-अलग सवारी और उनके अर्थ को विस्तार से बताया गया है। माता रानी की सवारी क्या होगी यह, माता के धरती पर आने वाले दिन पर निर्भर करता है। अगर माता रविवार या सोमवार को आती हैं तो वाहन गज होगा, मंगलवार या शनिवार को पधारेंगी तो माता अश्व यानी घोड़े पर सवार होकर आएंगी, बुधवार को माता नाव पर बैठकर आती हैं और गुरुवार और शुक्रवार पड़ने पर मां डोली में बैठकर आती हैं। इन सभी सवारियों में से अश्व और डोली पर सवार होकर आना शुभ नहीं माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह प्राकृतिक आपदाओं का संकेत होता है।