देवरिया। महाराष्ट्र के प्रसिद्ध अष्टविनायक गणपति मंदिरों में पांचवें क्रम पर चिंतामणि गणपति (Chintamani Ganpati) का स्थान है। यह मंदिर पुणे जिले के हवेली तालुका के थेऊर गांव में स्थित है, जो पुणे शहर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर है। मान्यता है कि यहां दर्शन करने से भक्तों की सभी चिंताएं दूर हो जाती हैं और मन को शांति की प्राप्ति होती है। इसी वजह से इस मंदिर में विराजमान गणपति को ‘चिंतामणि गणेश’ नाम से जाना जाता है।

तीन नदियों के संगम पर बसा मंदिर

चिंतामणि गणपति (Chintamani Ganpati) मंदिर प्राकृतिक दृष्टि से भी बेहद खास है। यह मंदिर तीन नदियों – भीम, मुला और मुथा के संगम पर स्थित है। मंदिर के पीछे ‘कंडतीर्थ’ नामक एक पवित्र तालाब भी है, जिसका धार्मिक महत्व है। मंदिर का प्रवेश द्वार उत्तर की ओर है और गर्भगृह के बाहर लकड़ी से बना एक विशेष कक्ष है, जिसे माधवराव पेशवा ने बनवाया था। जबकि मुख्य मंदिर का निर्माण धरणीधर महाराज देव ने करवाया था।

खास है चिंतामणि गणपति की मूर्ति

मंदिर में विराजमान चिंतामणि गणपति जी की मूर्ति पूर्वमुखी है और उनकी आंखों में हीरे जड़े हुए हैं। गणपति की सूंड बायीं ओर मुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश ने कपिल मुनी को उनसे छीना गया चिंतामणि हीरा फिर से दिलवाया था। बाद में ऋषि ने वह दिव्य हीरा गणपति जी को ही समर्पित कर दिया और तभी से वे चिंतामणि गणपति कहलाने लगे।

रोचक है मंदिर के पीछे की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, राजा अभिजीत और रानी गुनावती के पुत्र गणराज ने कपिल मुनी से चिंतामणि छीन ली थी। इस घटना के बाद भगवान गणेश ने गणराज से युद्ध कर वह मणि ऋषि को वापस लौटाई। कहा जाता है कि यह चिंतामणि भगवान इंद्र द्वारा कपिल मुनी को दी गई थी, जो हर इच्छा पूरी करने की शक्ति रखती थी। यह युद्ध कदंब वृक्ष के नीचे हुआ था, इसलिए इस स्थान को ‘कदंब तीर्थ’ भी कहा जाता है।

चिंतामणि गणपति मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपने इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण भी भक्तों और पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहां आने वाले श्रद्धालु यह मानकर आते हैं कि भगवान गणपति उनके जीवन से हर चिंता और कष्ट को दूर कर देंगे।