देवरिया। मंगलवार को राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को जमकर लताड़ा। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी बोल रहे थे। उन्होंने कुछ ऐसा बोला जिस पर सभापति ने आपत्ति जताई। जिसपर जयराम रमेश खड़े होकर प्रमोद तिवारी की कही गई बातों का अर्थ बताने लगे। इस पर सभापति धनखड़ ने आपत्ति जताते हुए कहा कि-“जयराम रमेश जी, आप बहुत इंटेलिजेंट हैं, आप ही खरगे जी की जगह ले लीजिए।” इस पर मल्लिकार्जुन खरगे अपने सीट पर खड़े हो गए और उन्होंने कहा कि- “ कहने लगे कि क्या वह मूर्ख हैं। उन्हें बनाने वाले न जयराम रमेश हैं, न आप, बल्कि सोनिया गांधी हैं।” इसके बाद सभापति धनखड़ गुस्से में आ गए और उन्होंने फिर खरगे को कड़े शब्दों में बहुत सी बाते कही।

मल्लिकार्जुन खरगे ने क्या कहा
मल्लिकार्जुन खरगे ने अपनी सीट पर खड़े होकर कहा कि- “आपके दिमाग में अब भी वर्ण वाला सिस्टम है। आप जयराम रमेश को इंटेलिजेंट और मुझे मंदबुद्धि बता रहे हैं।” इस पर सभापति ने कहा कि- “खरगे जी, आप मेरी बात को नहीं समझ पाए। जितना मैं आपका आदर करता हूं, उसका एक अंश भी आप मेरे लिए करेंगे तो आपको महसूस होगा। मैंने कहा क्या है? मैंने कहा कि जब प्रथम पंक्ति में आप जैसा व्यक्तित्व है, 56 साल का अनुभव है, उनको भी हर कदम के ऊपर जयराम रमेश टीका-टिप्पणी करके मदद करना चाहते हैं। अभी देखिए। एक प्रॉब्लम है, उसको आपको सॉल्व करना है।”


मुझ में बहुत धैर्य, बहुत सहनशक्ति है, खून का घूंट पी सकता हूं: धनखड़

खरगे ने कहा कि- “मुझे बनाने वाली सोनिया गांधी यहां बैठी हैं। मुझे न जयराम रमेश बना सकते हैं और न ही आप बना सकते हैं। मुझे जनता ने बनाया है।” इस पर सभापति जगदीप धनखड़ ने कड़े शब्दों में कहा- “’खरगे जी, मैं उस स्तर पर नहीं आना चाहता। मेरी बात को ध्यान से सुनिए। आप हर बार आसन का अपमान नहीं कर सकते। आप अचानक खड़े होते हैं और कुछ भी कह देते हैं मेरी बात को समझते भी नहीं हैं। इस देश के इतिहास और संसदीय लोकतंत्र में कभी भी आसन का इस तरह का अपमान नहीं किया गया, जैसा आपने किया है। सलीका सीखिए। मेरे में बहुत धैर्य है, बहुत सहनशक्ति है। खून का घूंट पी सकता हूं। मैंने कितना बर्दाश्त किया है, खरगे जी, आपको किसने बनाया ये आप जाने। मैंने जो मुद्दा उठाया, कैसे आपने ट्विस्ट किया। अंदाजा लगाइए। मेरे को भी पीड़ा होती है। कितने मौके आए हैं जब आपकी प्रतिष्ठा को कितना बड़ा धक्का लगा है पीछे से। मैंने देखा है। मैंने आपकी प्रतिष्ठा को बचाने की कोशिश की है और आप मुझे लांछित कर रहे हैं। सर ऐसा मत कीजिए। मैं सिंपल आदमी हूं। झुककर चलता हूं। पर ऐसा नहीं होना चाहिए।”