देवरिया। हमारा शरीर हर वक्त एक खास तरह की गंध छोड़ता रहता है। यह गंध हमारे शरीर से निकलने वाले कई केमिकल की वजह से पैदा होती है। जर्नल कम्यूनिकेशन्स केमिस्ट्री में छपी शोध रिपोर्ट से पता चला है कि यह गंध हर उम्र में बदलती रहती है। नवजात के शरीर से फूलों जैसी गंध आती है। यह गंध धीरे-धीरे बदलती जाती है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है शरीर की गंध भी बदलती जाती है। इस शोध से पता चला है कि किशोरों की गंध बकरी जैसी होती है। यह शोध करने वाली जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ एर्लांजेन-न्यूरेमबर्ग की डायना ओवसिंको कहती हैं- उम्र के साथ बदलती गंध की वजह खानपान भी है। खानपान की वजह से शरीर से निकलने वाली गंध में बदलाव होता है। शोध में पाया गया कि किशोरावस्था से पहले बच्चों के शरीर से ऐसे यौगिक भी रिलीज हो रहे थे, जिसमें चंदन और कस्तूरी जैसी गंध थी।

कार्बोक्सलिक एसिड्स की वजह से आती है गंध
हमारी त्वचा से निकलने वाले पदार्थों में एक सीबम होता है। इस चिपचिपे पदार्थ में कार्बोक्सलिक एसिड्स की मात्रा भी होती है। हमारे शरीर से निकलने वाली गंध की एक बड़ी वजह यही कार्बोक्सलिक एसिड्स होते हैं। जीवाणु हमारी त्वचा से निकलने वाले दूसरे कई पदार्थों को भी रासायनिक प्रक्रिया के जरिए कार्बोक्सिलिक एसिड में बदल देते हैं। जब बच्चा युवावस्था में आता है तो इस सीबम की मात्रा बढ़ जाती है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई मानक नहीं

यूनिवर्सिटी ऑफ एर्लांजेन-न्यूरेमबर्ग की हेलेने लूस गंध पर शोध करती हैं। वे बताती हैं कि इंसानी गंध के लिए कोई अंतर्राष्ट्रीय मानक नहीं हैं। इसलिए इस गंध की व्याख्या हर कोई अलग तरह से करता है, लेकिन इस गंध को समझने के लिए हमें इसकी किस न किसी चीज से तुलना ही करनी पड़ती है। वे यह भी कहती हैं- दो मस्की स्टेरॉयड और कार्बोक्सलिक एसिड्स के स्तर से यह पता चल सकता है कि किशोरों के शरीर की गंध कुछ लोगों को पसंद और कुछ को नापसंद क्यों होती है।