देवरिया। देश की राजधानी दिल्ली में 27 साल बाद भाजपा फिर से सत्ता में आ गई है। 15 साल के कांग्रेस के शासन के बाद आप ने दिल्ली का बागडोर संभाला था। लगा नए तरीके की राजनीति होगी। देश की नजर आप पर थी, लेकिन काजल की कोठरी में कालिख वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए 12 साल बाद आप अब प्रतिपक्ष में होगी। ये चुनाव इसलिए भी खास रहा क्योंकि इसमें किसी प्रत्याशी को सबसे कम वोट मिलने का भी रिकॉर्ड बना है।

परिवार के 4 लोगों ने ही दिया वोट

इस चुनाव में एक प्रत्याशी ऐसा भी था जिसे सिर्फ 4 वोट मिले। मानों सिर्फ उसके परिवार ने ही उसे वोट दिया हो। ये प्रत्याशी हैं भारतराष्ट्र डेमोक्रेटिक पार्टी के ईश्वर चंद। यह विधानसभा सीट थी नई दिल्ली, जो आमतौर पर मुख्यमंत्री सीट मानी जाती है। यहीं से जीतकर आईं ​शीला दीक्षित दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं और यहीं से केजरीवाल शीला दीक्षित को हराकर दिल्ली के मुख्यमंत्री बने। इसी सीट से 6 ऐसे प्रत्याशी हैं, जिन्हें 10 वोट भी नहीं मिले। भीम सेना के संघ नंद बौद्ध को सिर्फ 8 वोट मिले। राष्ट्रवादी जनलोक पार्टी (सत्य) के मुकेश जैन को भी 8 वोट ही मिले। राष्ट्रीय मानव पार्टी के नित्यानंद सिंह भी 8 वोट हासिल करने में कामयाब रहे। इन पार्टियों वाले प्रत्याशियों से ज्यादा बेहतर हालत में दो 2 निर्दलीय प्रत्याशी हैदर अली और पंकज शर्मा रहे। इन दोनों को को 9-9 वोट मिले।

प्रवेश वर्मा ने केजरीवाल को हराया

नई दिल्ली विधानसभा सीट पर भाजपा के प्रवेश वर्मा ने जीत दर्ज की है। उन्हें कुल 30,088 वोट मिले हैं। उन्होंन दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे अरविंद केजरीवाल को हराया। उन्हें 25,999 वोट मिले। हार का अंतर ज्यादा नहीं रहा, लेकिन उनकी हार के चर्चे उनकी हार से ज्यादा रहे। तीसरे नंबर पर कांग्रेस के संदीप दीक्षित रहे। हालांकि जमानत तो उनकी भी जब्त हुई। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे को सिर्फ 4568 वोट मिले। इस तरह नई दिल्ली विधानसभा सीट पर टॉप 3 पोजिशन पर वही पार्टियां रहीं जिनके बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा था।