देवरिया। देश में हजारों लोग एक ऐसी दुर्लभ जेनेटिक बीमारी से जूझ रहे हैं, जिसमें हल्का सा झटका या साधारण स्पर्श भी हड्डी तोड़ सकता है। इस बीमारी का नाम है-Osteogenesis Imperfecta, जिसे Brittle bone disease भी कहा जाता है। बार-बार फ्रैक्चर, प्लास्टर, सर्जरी और लंबा बेड रेस्ट- इन लोगों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी भी किसी चुनौती से कम नहीं होती। इसके बावजूद कई ऐसे लोग हैं, जिन्होंने हालात के आगे घुटने नहीं टेके। हालांकि कई तो जन्म से ही इस बीमारी से जूझ रहे हैं।
मदद के लिए बढ़े हाथ ने 300 लोगों की जिंदगी संवार दी
केरल स्थित एनजीओ ‘अमृतवर्षिनी’ 25 वर्षों में करीब 300 से ज्यादा ऐसे लोगों की मदद कर चुका है। संस्थापक लता नायर बताती हैं कि शुरुआत सिर्फ 10 लोगों से हुई थी। हम शिक्षा, इलाज, संसाधन और आर्थिक सहयोग के जरिए लोगों को आत्मनिर्भर बनने में मदद करते हैं। अमृतवर्षिनी से जुड़े लोगों में कोई आज डॉक्टर है, कोई मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर रहा है, तो कोई पत्रकार बनकर चुनाव कवर कर रहा है। हर साल आयोजित होने वाला ‘वाल्सल्यवर्षम’ कार्यक्रम इन लोगों को एक-दूसरे से मिलने, अनुभव साझा करने और आत्मबल बढ़ाने का अवसर देता है।
बीमारी से ही नहीं समाज की सोच से भी लड़े
इन कहानियों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन लोगों ने सिर्फ बीमारी से नहीं, बल्कि समाज की सोच से भी लड़ाई लड़ी। छोटे कद, व्हीलचेयर या शारीरिक सीमाओं के कारण उन्हें बार-बार रिजेक्शन झेलना पड़ा। लेकिन सही समय पर सहयोग, परिवार का साथ और खुद पर भरोसे ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।
इंफोसिस में यूआई-यूएक्स डिजाइनर बनी अनैडा
28 वर्षीय अनैडा का जन्म Osteogenesis Imperfecta के साथ हुआ। जन्म के समय ही दाहीने हाथ में फ्रैक्चर था। समय पर बीमारी की पहचान होने से रॉडिंग सर्जरी संभव हो सकी, जिससे धीरे-धीरे चलना संभव हुआ। बचपन में बार-बार फ्रैक्चर, लंबे बेडरेस्ट और Scoliosis के कारण रीढ़ की सर्जरी करानी पड़ी। छठी कक्षा तक सामान्य स्कूल में पढ़ाई की, बाद में मां की देखरेख में पढ़ना पड़ा। दसवीं में एक रियलिटी शो के जरिए उन्हें अमृतवर्षिनी के बारे में पता चला, जिसने शिक्षा में सहयोग दिया। ड्रॉइंग में रुचि के चलते उन्होंने एनीमेशन में ग्रेजुएशन और मास्टर्स किया, नेट परीक्षा भी पास की। कॉलेज में पढ़ाने के इंटरव्यू में ‘छोटे कद’ और विकलांगता के कारण रिजेक्शन मिला, लेकिन Infosys में नौकरी मिलने से जिंदगी बदली। आज वे घर से काम करते हुए आत्मनिर्भर हैं और अपनी कार भी खरीद चुकी हैं।
मेडिकल के लिए अनफिट बताई गई, आज डॉक्टर हैं सेन्ड्रा
केरल के तिरुवल्ला में जन्मी डॉ. सेन्ड्रा का जन्म सात महीने में हुआ था। आठ महीने की उम्र में फीमर फ्रैक्चर के बाद Osteogenesis Imperfecta का पता चला। बचपन अस्पताल, फ्रैक्चर और बेडरेस्ट में बीता। पांचवीं तक नियमित स्कूल नहीं जा सकीं। डॉक्टरों को देखते-देखते खुद डॉक्टर बनने का सपना जगा। तमाम सर्जरी और स्पाइन ऑपरेशन के बावजूद उन्होंने दसवीं-बारहवीं अच्छे अंकों से पास की। पहली बार एमबीबीएस प्रवेश में असफल रहीं। दूसरी बार फ्रैक्चर के बावजूद अस्पताल के बिस्तर से पढ़ाई की और वॉकर के सहारे परीक्षा दी। मेडिकल बोर्ड ने उन्हें unfit घोषित किया, लेकिन एक डॉक्टर के समर्थन से दाखिला मिला। तमाम शारीरिक और मानसिक संघर्षों को पीछे छोड़ते हुए सेन्ड्रा आज डॉक्टर हैं।
18 साल तक स्कूल नहीं गई, आज पत्रकार हैं रुचिता
ओडिशा की 25 वर्षीय रुचिता साहूकार भी इसी बीमारी से पीड़ित हैं। बीमारी के कारण वे लगभग 18 वर्षों तक औपचारिक स्कूली शिक्षा से वंचित रहीं। समाज और संस्थानों की निराशा के बावजूद माता-पिता ने उनका साथ नहीं छोड़ा। अमृतवर्षिनी से जुड़ने के बाद रुचिता की जिंदगी बदली। IGNOU के माध्यम से उन्होंने समाजशास्त्र और अंग्रेजी साहित्य में स्नातक किया। यह कोर्स उन लोगों के लिए है, जिनके पास पारंपरिक 10+2 योग्यता नहीं होती। वर्तमान में वे देश के एक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई कर रही हैं। उनके लेख राष्ट्रीय अखबारों में प्रकाशित हो चुके हैं और वे 2025 के बिहार चुनाव भी कवर कर चुकी हैं।
खुद पढ़ाई पूरी न कर सकी पर आज दुनिया भर के बच्चों को पढ़ाती है अंशिका
इंदौर की अंशिका बचपन से ही लगातार फ्रैक्चर झेलती रही। 10 महीने की उम्र में पहला फ्रैक्चर हुआ और डॉक्टरों ने बचने की उम्मीद भी कम जताई थी। लेकिन माता-पिता के प्यार और देखभाल ने हर आशंका को गलत साबित किया। पढ़ाई के प्रति उनका समर्पण ऐसा था कि हाथ टूटने पर बाएं हाथ से लिखकर भी कक्षा में अव्वल रहीं। कई वर्षों तक बिस्तर पर रहने के बावजूद घर से पढ़ाई जारी रही। व्हीलचेयर पर बैठकर 10वीं अच्छे अंकों से पास की। 12वीं के बाद सीए की पढ़ाई शुरू की और फाउंडेशन व इंटरमीडिएट सफलतापूर्वक पास किया। Scoliosis के कारण सीए फाइनल की पढ़ाई रोकना पड़ी। लेकिन उन्होंने घर से ट्यूशन और ऑनलाइन पढ़ाना शुरू किया। आज वे दुनिया भर के छात्रों को पढ़ा रही हैं।