देवरिया।हमारे देश के मंदिर अतुलनीय इतिहास और अद्भुत कारीगरी का उदाहरण हैं। कई ऐसे मंदिर हैं, जिनका इतिहास अनसुना रह गया है। भोलेनाथ का प्रिय माह श्रावण चल रहा है, आज हम आपको मध्यप्रदेश में स्थिति एक ऐसे मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जो भक्ति और इतिहास दोनों का केंद्र है। यहां विराजे हैं भोजेश्वर महादेव। इस मंदिर का निर्माण सदियों पहले किया गया था और कहा जाता है मंदिर का निर्माण अभी भी अधूरा है लेकिन पत्थरों को तराशकर बनाया गया यह मंदिर अधूरा होने के बावजूद बहुत सुंदर लगता है।

कहां है भोजेश्वर शिवजी का यह मंदिर
भोजेश्वर शिवजी का यह मंदिर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से सिर्फ 32 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर स्थित है। इस मंदिर का निर्माण परमार वंश के प्रसिद्ध राजा, राजा भोज के द्वारा कराया गया था। राजा भोज के नाम से ही भोपाल का नाम भी पड़ा है। कहा जाता है यह मंदिर मुगलों के भारत आने से भी पहले का है। मंदिर के आस पास की सुंदर वादियां और पास बहती बेतवा नदी से मंदिर के आसपास का नजारा मन को सुकुन देने वाला होता है। मान्यता है कि पांडवों ने भी अपने वनवास के दौरान इस मंदिर में पूजा की थी। कुछ जगहों पर इस बात का भी उल्लेख है कि उसी दौरान पांडवों ने ही मंदिर का निर्माण किया था।

क्यों अधूरा है मंदिर का निर्माण
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस मंदिर के निर्माण के पीछे एक स्थिति यह थी किइसका निर्माण एक रात में ही करना होगा। सूर्योदय होते ही जहां तक मंदिर का निर्माण हुआ होगा, वहीं पर विराम लग जाएगा। रातभर में शिवलिंग और मंदिर के कुछ भाग का निर्माण तो हो गया लेकिन गुंबद और मंदिर के कुछ हिस्सों की कारीगरी का काम रह गया और सूर्योदय होने की वजह से सारे कारीगर गायब हो गए। मंदिर की बनावट देखने से आज भी लगता है कि मंदिर का काम अधूरा है। दीवारों पर आधी अधूरी मूर्तियां, दीवारों पर मूर्तियों के लिए खींची गई रेखाएं इस बात का सबूत हैं कि मंदिर का काम बीच में ही रोका गया था।

विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यहां स्थापित शिवलिंग विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग माना जाता है। यहां पर स्थापित भोजेश्वर शिवलिंग की लंबाई 18 फीट, व्यास 7.5 फीट है जिसमें केवल लिंग की लंबाई 12 फीट बताई जाती है। साथ ही यह देश का एकलौता ऐसा शिवलिंग है जो एक ही चट्टान को तराशकर बनाया गया है। शिवलिंग के साथ ही इस मंदिर का मुख्य द्वार भी दूसरे किसी भी मंदिर के मुख्य द्वार से बड़ा है। इतना बड़ा मुख्य द्वार देश और विदेश के किसी भी मंदिर का नहीं है

साल में 2 बार लगता है मेला
भोजपुर के शिव मंदिर की एक खासियत यह भी है कि यहां पर शिवलिंग की ऊंचाई इतनी ज्यादा है कि जल अभिषेक करने के लिए जलहरी पर चढ़कर जल चढ़ाया जाता है। कुछ समय पहले भक्तों को जलहरी तक जाकर पूजा अर्चना और अभिषेक करने की अनुमति थी लेकिन अभी यहां तक भक्तों का आना मना हो गया है। अब केवल मंदिर के पुजारी ही जलहरी तक जा कर शिवजी की पूजा और उनका श्रृंगार करते हैं। यहां पर पूरे सावन भक्तों की भारी भीड़ रहती है, इसके साथ ही साल में दो बार विशाल मेले का भी आयोजन किया जाता है।
