देवरिया। वक्फ संशोधन विधेयक (wakf amendment bill) पर संयुक्त संसदीय समिति की बैठक हुई। बैठक में JPC ने वक्फ अधिनियम में संशोधन (wakf amendment bill) के सभी 14 बदलावों पर मुहर लगा दी है। वहीं विपक्षी सांसदों के सभी प्रस्ताव खारिज कर दिए गए हैं। आपको बता दें, वक्फ संशोधन विधेयक अगस्त 2024 में पेश किया गया था। समिति में जगदम्बिका पाल के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने 44 संशोधनों का प्रस्ताव रखा था जिन्हें आज बैठख के बाद निरस्त कर दिया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब 29 जनवरी को प्रस्तावति बदलाव पर मतदान कराया जाएगा, 31 जनवरी तक आखिरी रिपोर्ट दी जाएगी और 29 नवंबर तक रिपोर्ट पेश किया जा सकता है।

क्या हैं संशोधन विधेयक के प्रस्ताव?

वक्फ संशोधन विधेयक (wakf amendment bill)में वक्फ बोर्डों के प्रशासनिक तरीकों में बदलाव करने का प्रस्ताव दिया गया है। इसमें गैर-मुस्लिम और कम से कम दो महिला सदस्यों को नामित करना, केंद्रीय वक्फ परिषद में एक केंद्रीय मंत्री और तीन सांसद, इसके साथ ही दो पूर्व न्यायाधीश, चार ‘राष्ट्रीय ख्याति’ वाले लोग और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल होने का प्रस्ताव किया गया है। इनमें से किसी सदस्य का मुस्लीम धर्म से होना जरूरी नहीं होगा। नए प्रस्तावों में यह भी शामिल किया गया है कि वक्फ परिषद भूमि पर दावा नहीं कर सकेगा।

विपक्ष ने लगाया पक्षपात का आरोप


विपक्षी सांसदों ने बैठक पर बैठक की कार्यवाही की निंदा की। उन्होंने जगदंबिका पाल पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को “विकृत” करने का आरोप लगाया। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा- “यह एक हास्यास्पद कवायद थी। हमारी बात नहीं सुनी गई। पाल ने तानाशाही तरीके से काम किया है।” जबकी दूसरी तरफ जगदंबिका पाल ने विपक्ष के सभी आरोप को खारिज करते हुए कहा3 कि- “आज खंड-दर-खंड बैठक हुई। विपक्षी सदस्यों ने 44 खंडों पर संशोधन पेश किए। मैंने सदस्यों से पूछा कि क्या वे संशोधन पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे संशोधन पेश करेंगे। इससे ज़्यादा लोकतांत्रिक कुछ नहीं हो सकता। आज जिस तरह के संशोधन पारित हुए हैं।  मुझे लगता है कि इससे बेहतर विधेयक तैयार होगा।”

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