देवरिया। अगर आपको भी बिस्तर से ज्यादा फर्श पर लेटना पसंद है तो आप अकेले नहीं हैं। दुनिया भर में आप जैसे लाखों लोग हैं, जिन्हें फर्श पर सुकून मिलता है। जल्दी नींद आती है। दफ्तर, कॉलेज, जिम से लौटने वाले कई लोग फर्श पर लेटकर थकान मिटाते हैं। रिसर्च में पाया गया है कि फर्श पर लेटने से ना सिर्फ शरीर रिलैक्स फील करता है बल्की हमारा दिमाग भी शांत महसूस करता है।


शरीर और मनोदशा का होता है बेहतर सामंजस्य
अमेरिका के बोस्टन में क्लिनिकल साइक्लॉजिस्ट एलन हेंड्रिक्सन कहती हैं- “फर्श पर लेटने से आप हल्का महसूस करते हैं क्योंकि आपका शरीर खास तरह से आराम की स्थिति में चला जाता है। ऐसे में शरीर और मनोदशा एक दूसरे से बेहतर सामंजस्य बना पाते हैं। इससे निराशा का भाव खत्म होता है और आपमें आत्मविश्वास जागता है। आपको लगने लगता है कि आप कोशिश करेंगे तो कामयाब हो जाएंगे। वे कहती हैं- कोई कुर्सी या सोफे पर बैठकर ऐसा ही महसूस नहीं कर सकता। दरअसल, शरीर किस अवस्था में है, उसका असर सीधा हमारी सोच पर पड़ता है। फर्श पर लेटने से जमीन से जुड़े होने का भी एहसास होता है। इससे भी सोच पर फर्क पड़ता है।”


‘फर्श पर लेटिए शांति मिलेगी’
यूनिवर्सिटी ऑफ यूटाह की प्रोफेसर और रेस्टोरेटिव एंबोडिमेंट एंड रिजिलेंस की लेखिका एलन फोजेल कहती हैं- “अगर आपको कोई बात परेशान कर रही है और वह बार-बार दिमाग में चल रही है तो फर्श पर लेटिए। शांति मिलेगी। पश्चिमी सभ्यता में जीने वाले लोग, जो लंबे समय से या कभी फर्श पर नहीं लेटे हैं, उनके लिए यह बिल्कुल ही नया एहसास होगा। दरअसल, सोने की जगह बदलने से भी सोच में फर्क आता है। दरअसल कठोर सतह पर आप मन की बात से ज्यादा शरीर को महसूस करते हैं।”


जमीन पर लेटना एक तरह का योग
फर्श पर सोना एक तरह का शवासन करना ही है। जैसे शवासन में झपकी आना और शरीर को महसूस करना आसान होता है और थोड़ी देर बाद राहत मिलती है। कोरिया के घरों में रोडिएंट हीटिंग सिस्टम होता है। इससे फर्श गर्म रहता है। इसलिए लोग फर्श पर ही सोते हैं। एनवाईयू ग्रॉसमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन के मनोवैज्ञानिक और साइकेट्री के क्लिनिकल प्रोफेसर रैशेल गोल्डमैन कहते हैं- आप रोज कुछ समय फर्श पर लेटकर बिता सकते हैं। इससे आप रिजार्ज जैसा महसूस करेंगे।