देवरिया: उत्तर प्रदेश में आयोजित की गई पुलिस भर्ती परीक्षा राज्य के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी भर्ती परीक्षा है। इससे पहले इतनी व्यापक स्तर की रोजगार परीक्षा कभी नहीं हुई थी। फरवरी 2024 में हुए पेपर लीक के बाद सरकार ने इस परीक्षा को पुनः दोगुनी सुरक्षा व्यवस्था के साथ आयोजित किया है। इस बार परीक्षार्थियों को परीक्षा हॉल तक पहुंचने से पहले कई स्तरों पर चेकिंग से गुजरना पड़ रहा है।


60 हजार से अधिक पदों के लिए परीक्षा
इस परीक्षा में 60,244 पदों के लिए 48 लाख परीक्षार्थी हिस्सा ले रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों के कारण परीक्षा का आयोजन 5 अलग-अलग तारीखों में किया जा रहा है, जिसमें हर दिन दो-दो पालियों में परीक्षा हो रही है। परीक्षा की तिथियां 23, 24, 25, 30 और 31 अगस्त तय की गई हैं, और इसके लिए राज्य के 67 जिलों में 1,174 केंद्र बनाए गए हैं।


नकल रोकने के लिए कड़े इंतजाम
यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा न केवल सबसे बड़ी बल्कि सबसे सुरक्षित परीक्षा भी बन गई है। नकल रोकने के लिए परीक्षा केंद्रों पर ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे और मोबाइल जैमर लगाए गए हैं। हर केंद्र पर मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है। परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से एक घंटे पहले पहुंचना अनिवार्य है।

परीक्षार्थियों के लिए मुफ्त बस सेवा
परीक्षा के विशाल आयोजन को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने परीक्षार्थियों के लिए मुफ्त बस सेवा शुरू की है। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में अभ्यर्थियों को मुफ्त सफर की सुविधा दी जा रही है। इसके लिए परीक्षार्थियों को अपने प्रवेश पत्र की एक फोटोकॉपी साथ लेनी होगी, जो परीक्षा केंद्र तक जाने और वापस लौटने के समय बस कंडक्टर को देनी होगी।


गड़बड़ियों पर सख्त सजा का प्रावधान
उत्तर प्रदेश सरकार ने परीक्षाओं में गड़बड़ी और अनुचित साधनों को रोकने के लिए ‘उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अध्यादेश-2024’ (उत्तर प्रदेश अध्यादेश संख्या-6, सन 2024) को 01 जुलाई, 2024 को अधिसूचित किया है। इस अधिनियम के तहत, प्रश्नपत्र लीक करना, उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ करना, नकल करना या नकल कराना अपराध माने जाएंगे, और दोषियों को एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना और आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।