देवरिया। यूनेस्को ने भारत के दो और स्थानों को विश्व विरासत की सूची में जगह दी है। लंबे समय से मांग किए जा रहे शांति निकेतन और कर्नाटक के होयसल मंदिर समूह अब विश्व धरोहर घोषित कर दिए गए हैं। यह फैसला सऊदी अरब के रियाद में चल रहे विश्व धरोहर समिति के 45वें सत्र के दौरान लिया गया। यूनेस्को ने शांति निकेतन को विश्व धरोहर में शामिल किए जाने का ऐलान एक्स पर रविवार को किया जबकि होयसल मंदिर के नाम का ऐलान सोमवार को करते हुए भारत को बधाई भी दी।

लंबे समय से की जा रही कोशिश हुई सफल

पश्चिम बंगाल के बीरभूम में स्थित शांति निकेतन को विश्व धरोहर में शामिल करने की कोशिश भारत लंबे समय से कर रहा था। शांति निकेतन, रवींद्रनाथ टैगोर के पिता देबेंद्रनाथ टैगोर द्वारा बनाया गया एक आश्रम था, जहां जाति और पंथ से परे कोई भी, आ सकता था और परमेश्वर पर ध्यान कर सकता था। बाद में रवींद्रनाथ टैगोर ने इस विश्वविद्यालय को स्थापित किया और इसे विज्ञान के साथ कला और संस्कृति की पढ़ाई का उत्कृष्ट केंद्र बनाया। 1901 में केवल 05 छात्रों के साथ गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर ने इसकी शुरुआत की थी। 1921 में इसे राष्ट्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला और आज यहां 6 हजार से भी ज्यादा विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। इस पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा-“मुझे खुशी और गर्व है कि शांति निकेतन को आखिरकार यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है”।

सभी भारतीयों के लिए गर्व का क्षण: पीएम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- “ यह सभी भारतीयों के लिए गर्व का क्षण है। खुशी है कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के दृष्टिकोण और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक शांतिनिकेतन को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है”।

होयसल मंदिर भी अब विश्वधरोहर में शामिल

कर्नाटक में बेलूर, हलेबिड और सोमनाथपुरा के होयसल मंदिर समूह को भी यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल कर लिया गया है। होयसल मंदिर 12वीं-13वीं शताब्दी में बनाए गए थे। कला एवं साहित्य के संरक्षक माने जाते होयसल राजवंश की यह राजधानी थी। तीन होयसला मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तहत संरक्षित स्मारक हैं। इसलिए एएसआई इसका संरक्षण और रखरखाव करता है।

भारत के लिए गर्व का पल: पीएम

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत के लिए गर्व का पल करार दिया।  उन्होंने कहा कि भारत के लिए और भी गौरव की बात। होयसल के शानदार पवित्र मंदिरों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। होयसल मंदिरों की शाश्वत सुंदरता भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और हमारे पूर्वजों के असाधारण शिल्प कौशल का प्रमाण है।”

हमारी वास्तुकला के लिए एक और मान्यता: एस जयशंकर

होयलस मंदिर को विश्व धरोहर के रूप में शामिल कि जाने पर बधाई देते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा- “एक और अच्छी खबर आ रही है। हमारी पारंपरिक कला और वास्तुकला के लिए एक और मान्यता।” आपको बता दें ‘होयसल के पवित्र मंदिर समूह’ यूनेस्को की संभावित सूची में अप्रैल 2014 से ही शामिल थे। भारत ने इसे साल 2022-2023 के लिए विश्व धरोहर के रूप में विचार के लिए नामांकन के रूप में भेजा था।


होयसल मंदिर भी अब विश्वधरोहर में शामिल
कर्नाटक में बेलूर, हलेबिड और सोमनाथपुरा के होयसल मंदिर समूह को भी यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल कर लिया गया है। होयसल मंदिर 12वीं-13वीं शताब्दी में बनाए गए थे। कला एवं साहित्य के संरक्षक माने जाते होयसल राजवंश की यह राजधानी थी। तीन होयसला मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तहत संरक्षित स्मारक हैं। इसलिए एएसआई इसका संरक्षण और रखरखाव करता है।

भारत के लिए गर्व का पल: पीएम

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत के लिए गर्व का पल करार दिया। उन्होंने कहा कि भारत के लिए और भी गौरव की बात। होयसल के शानदार पवित्र मंदिरों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। होयसल मंदिरों की शाश्वत सुंदरता भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और हमारे पूर्वजों के असाधारण शिल्प कौशल का प्रमाण है।”

हमारी वास्तुकला के लिए एक और मान्यता: एस जयशंकर
होयलस मंदिर को विश्व धरोहर के रूप में शामिल कि जाने पर बधाई देते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा- “एक और अच्छी खबर आ रही है। हमारी पारंपरिक कला और वास्तुकला के लिए एक और मान्यता।” आपको बता दें ‘होयसल के पवित्र मंदिर समूह’ यूनेस्को की संभावित सूची में अप्रैल 2014 से ही शामिल थे। भारत ने इसे साल 2022-2023 के लिए विश्व धरोहर के रूप में विचार के लिए नामांकन के रूप में भेजा था।