देवरिया। देवियों की पूजा का सबसे महत्वपूर्ण नौ दिन यानी नवरात्र के शुभ दिनों में वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में मां श्रृंगार गौरी की पूरे विधि विधान से पूजा की गई। ज्ञानवापी के एएसआई सर्वे के साथ ही काफी लंबे समय से मां श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा की अनुमति याचिकाकार्ता मांग रहे थे। लंबे समय बाद पूजा की अनुमति मिलने और पूजा करके लोग काफी उत्साहित नजर आए।
याचिकाकर्ता महिलाओं और शिवसैनिक कार्यकर्ताओ ने की पूजा
चतुर्थी पर महिलाओं ने श्रृंगार गौरी की पूजा अर्चना की। ये वही महिला याचिकाकर्ता हैं, जिन्होंने श्रृंगार गौरी की पूजा अर्चन के लिए कोर्ट में याचिका लगाकर अनुमति मांगी थी। नवरात्री पर पहली बार इन महिलाओं को तहखाने में प्रवेश कर के पूजा करने की अनुमति दी गई थी। बाजे-गाजे के साथ महिलाएं, बच्चे और शिवसैनिक कार्यकर्ता पहले काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे फिर मां श्रृंगार गौरी की पूजा की। पूजा करने गए समूह में दूसरे हिंदूवादी संगठन में शामिल हुए।
पूजा से पहले निकली शोभा यात्रा, सुरक्षा बल रहे तैनात
मां श्रृंगार गौरी की पूजा की अनुमती लंबे इंतजार के बाद मिली थी, जिसका उत्साह लोगों में साफ दिखाई दे रहा था। किसी प्रकार का तनाव ना हो इसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा की पूरी व्यवस्था की थी। महिलाएं और बच्चों समेत सभी भक्त माता का जयकारा लगाते हुए मंदिर की ओर आए। शिवसैनिक साथ में डमरू बजाते हुए भी चल रहे थे लेकिन दरवाजे पर तैनात पुलिसकर्मियों उन्हें मंदिर के अंदर डमरू ले जाने से मना कर दिया और बाहर ही डमरू जमा करा लिए गए। सभी लोगों से शांति पूर्वक पूजा करने का आग्रह किया।
पूजा से पहले निकाली गई शोभायात्रा
श्रृंगार गौरी की पूजा को लेकर पूरे वाराणसी में उत्साह देखने को मिल रहा था। पूजा से पहले वाराणसी में भव्य शोभायात्रा निकाली गई थी। शोभायात्रा मैदागिन स्थित गोरखनाथ मठ से शुरु हुई और वाराणसी के सभी मुख्य मार्गों होते हुए श्रृंगार गौरी तक पहुंची। इस पूरे कार्यक्रम में ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद भी शामिल हुआ।