देवरिया। उत्तराखंड के उत्तरकाशी में सिल्क्यारा सुरंग में फंसे मजदूरों को निकालने की कोशिशें लगातार जारी है। निर्माणाधीन सुरंग में 12 नवंबर से 41 मजदूर फंसे हुए हैं। 21 नवंबर को सभी मजदूरों को फंसे हुए 10 दिन हो चुके हैं। रेस्क्यू टीम लगातार मजदूरों से बात करने और उनसे संपर्क बनाए रखी है। मजदूरों को पाइप के माध्यम से खाने का सामान, पीने का पानी और ऑक्सिजन उपलब्ध कराई जा रही है। वॉकी टॉकी से बीच-बीच में बात भी हो रही है।

10 दिन बाद फंसे मजदूरों की तस्वीर आई सामने
रेस्क्यू टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन के 10 दिन बाद कुछ राहत की सांस ली है। टनल में फंसे मजदूरों की तस्वीर सामने आई है। तस्वीर में सभी मजदूर सुरक्षित नजर आ रहे हैं। पाइप के माध्यम से मजदूरों तक कैमरे भेजे गए और उनकी स्थिति का जायजा लिया गया है। अभी तक मजदूरों को पानी और ड्राय फ्रूट्स भेजे जा रहे थे। पहली बार उन्हें फलों में संतरा, सेब, केले और खाने केलिए खिचड़ी भेजी गई। पाइप के माध्यम से ही उन्हें मोबाइल फोन और चार्जर भेजा गया है ताकी उनसे संपर्क होता रहे। आज से वर्टिकल ड्रिलिंग का काम भी शुरु कर दिया गया है।
सीएम ने भी तस्वीर मिलने की जानकारी साझा की
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रेस्क्यू ऑपरेशन का अपडेट देते हुए कहा कि- ‘सिल्क्यारा उत्तरकाशी में निर्माणाधीन टनल में फंसे श्रमिकों की पहली बार तस्वीर प्राप्त हुई है। सभी श्रमिक भाई पूरी तरह सुरक्षित हैं, हम उन्हें शीघ्र सकुशल बाहर निकालने हेतु पूरी ताक़त के साथ प्रयासरत हैं।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लगातार सीएम धामी के संपर्क में हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन का अपडेट ले रहे हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी ये टीमें
मजदूरों को रेस्क्यू करने में पिछले दस दिनों से शासन और प्रशासन दोनों दिन रात जुटा हुआ है। रेस्क्यू टीम में भारतीय सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, बीआरओ, एनएचआईडीसीएल, उत्तराखंड पुलिस, एसजेवीएनएल, आरवीएनएल, लार्सन एंड टूब्रो, टीएचडीसी, आपदा प्रबंधन विभाग, जिला प्रशासन, ओएनजीसी, आईटीबीपी, राज्य लोनिवि, डीआरडीओ, परिवहन मंत्रालय, होमगार्ड्स की टीमें लगातार कोशिश में लगी हुई हैं। मजदूरों तक पहुंचने के लिए ड्रिल का काम किया जा रहा है, जिसके लिए आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल करके जल्द से जल्द मजदूरों को निकालने की कोशिश जारी है। आज एसजेवीएन की ड्रिल मशीन सुरंग के ऊपर पहुंचा दी जाएगी, इसे इंस्टॉल करने में ही 24 घंटे का समय लगेगा। आरवीएनएल की ड्रिल मशीन भी सुरंग के ऊपर जाएगी। रोबोट को चलाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि मजदूरों तक पहुंच और आसान हो।