देवरिया। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के हस्तशिल्पियों, कारीगरों और स्थानीय उद्यमियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए इस साल दिवाली से पहले ‘स्वदेशी मेला’ आयोजित करने की घोषणा की है। MSME मंत्री राकेश सचान ने बताया कि इस बार यह मेला पूरे प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ आयोजित किया जाएगा, जो लगभग 9 से 10 दिनों तक चलेगा।
‘लोकल टू वोकल’ को मिलेगा बढ़ावा
मंत्री राकेश सचान ने बताया कि इस आयोजन को उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) के बैनर तले रखा जाएगा और इसके साथ ‘स्वदेशी मेला’ का नाम जोड़ा जाएगा। उनका कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘लोकल टू वोकल’ मंत्र को आगे बढ़ाना और प्रदेश में बनने वाले स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना है।
लोकल प्रोडक्ट्स को मिलेगी प्राथमिकता
अब तक ऐसे मेलों का आयोजन केवल 18 मंडलों तक सीमित था, लेकिन पहली बार इसे पूरे प्रदेश के 75 जिलों तक विस्तार दिया जा रहा है। मेलों का शुभारंभ संबंधित जिलों में मंत्री और विधायक करेंगे। प्रदर्शनी में स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि छोटे कारीगरों और हस्तशिल्पियों को सीधा मंच मिल सके। दिवाली से ठीक पहले इस तरह का आयोजन छोटे कारीगरों की आमदनी को बढ़ाएगा।
हर जिले का उत्पाद सीधे बाजार से जुड़ेगा
MSME मंत्री ने बताया कि प्रदेश में तीन यूनिटी मॉललखनऊ, वाराणसी और आगरा में केंद्र सरकार की मदद से तैयार किए जा रहे हैं। सरकार की योजना है कि आने वाले समय में सभी 75 जिलों में यूनिटी मॉल की स्थापना की जाए। इन मॉल्स के जरिए हर जिले के विशिष्ट उत्पाद को सीधे बाजार से जोड़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगले वर्ष 25 से 29 सितंबर 2026 तक होने वाला UPITS का चौथा चरण और भी बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाएगा। इससे न केवल राज्य के उद्यमियों और कारीगरों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने का मौका मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए साधन भी पैदा होंगे।