देवरिया। प्रयागराज में महाकुंभ (maha kumbh 2025) के लिए मेला क्षेत्र पुरी तरह से सज-धज कर तैयार है। मेला क्षेत्र का नजारा देखते ही बन रहा है। कल तक जिन घाटों में सिर्फ रोजाना के श्रद्धालुओं का आना जाना था आज वहां पूरा एक आध्यात्मिक शहर बस चुका है। अलग-अलग अखाड़ों के साधु संत और उनके कैंप देखने को मिल रहे हैं। संगम नगरी में पूरे देश के कोने-कोने से संतों का समागम देखने को मिल रहा है। ऐसे में यहां कुछ ऐसे संत भी आए हुए हैं जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन्हें देखने के लिए ही लोग उत्सुक नजर आ रहे हैं। आइए जानते हैं (maha kumbh 2025)महाकुंभ में पहुंचे अनोखे साधुओं के बारे में।

3 फीट के बाबा, गंगापुरी महाराज

महाकुंभ में गंगापुरी महाराज अपनी हाइट को लेकर आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। गंगापुरी महाराज की हाइट सिर्फ 3 फीट की है। छोटी सी हाइट में बाबा को भगवा धारण किए और सर पर जटा देखकर कोई भी अचरज में पड़ जाता है। जैसे ही वो अपने कैंप से निकलते हैं लोगों की भीड़ उन्हें घेर लेती है। गंगापुरी महाराज जूना अखाड़े के संत हैं और कामाख्या देवी पीठ से जुडे हुए हैं।

आपको बता दें गंगापुरी महाराज ने 32 सालों से स्नान नहीं किया है। अभी भी वो कुंभ में शाही स्नान का हिस्सा नहीं बनेंगे। उन्होंने अपने किसी संकल्प की वजह से स्नान नहीं किया है। उनका कहना है संकल्प पूरा होते ही वो क्षिप्रा नदी में नहाकर अपना संकल्प तोड़ेंगे। हालांकी उनका संकल्प गुप्त है उसके बारे में उन्होंने किसी को नहीं बताया है।

साइकिल से कुंभ पहुंचे साइकिल वाले बाबा

कुंभ (maha kumbh 2025)में साइकिल से यात्रा कर पहुंचे हैं बाबा संपत दास रामानंद ब्रह्मचारी। अब बाबा संपत दास कुंभ में साइकिल वाले ब्रह्मचारी बाबा के नाम से मशहूर हो चुके हैं। उन्होंने अपनी साइकिल को ही रथ का रूप दे दिया है और उसी से पूरे देश के मंदिरों में भ्रमण करते है। कुंभ में भी वो साइकिल से ही पहुंचे हैं। अब करीब डेढ़ महीने वो यहीं रहेंगे। साइकिल वाले बाबा मेला क्षेत्र में अपनी खास तरह से सजी साइकिल से ही भ्रमण करते नजर आते हैं।

संपत दास रामानंद ब्रह्मचारी बाबा, बिहार के औरंगाबाद के रहने वाले हैं। उन्होंने भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने और सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करने का संकल्प लिया है।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे अनाज बाबा

मेला क्षेत्र में आपको साधुओं के बीच एक ऐसे बाबा भी नजर आएंगे जिन्होंने अपने सर पर ही अनाज उगाया हुआ है। जी हां ये बाबा अनाज बाबा के नाम से मशहूर हो रहे हैं। ये बाबा हैं सोनभद्र के रहने वाले बाबा अमरजीत। ये बाबा पिछले 14 सालों से अपने सर पर अलग-अलग अनाजों को उगाते आ रहे हैं। मौनी अमावस्या के दिन उनके सर पर उगा अनाज तैयार हो जाएगा जिसे वो भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित कर देंगे।

बाबा का संकल्प लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। ऐसा करके वो संदेश देना चाहते हैं कि पर्यावरण से हमारा जीवन है। यह उनके ‘हठ योग’ साधना का ही एक अभ्यास है। उनका कहना है वो लोगों को हरियाली और पर्यावरण के प्रति जागरूक करना चाहते हैं। बाबा से हमे सीखने मिलता है कि जब वो अपने सर पर हरियाली का बोझ उठा सकते हैं तो हम अपने आस-पास जमीन पर भी हरियाली फैला सकते हैं।

अहंकार त्यागने का संदेश देते कबीरा बाबा

रायबरेली से आए हरिश्चंद्र विश्वकर्मा कबीरा बाबा के नाम से जाने जाते हैं। कबीरा बाबा अपने 20 किलो वजनी चाबी की वजह से मशहूर हैं। वो अपने रथ से (maha kumbh 2025)कुंभ पहुंचे हैं जो बिना किसी इंजन के चलती है। कबीरा बाबा का कहना है उनकी यह चाबी अहंकार का ताला खोलने का प्रतीक है। चाबी पर लिखा है- “हे मानव, सत्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलो।”  

कबीरा बाबा ने सिर्फ 16 साल की उम्र में ही समाज की बुराइयों को खत्म करने और समाज में फैले नफरत को समाप्त करने का संकल्प लिया था। तभी से वो देश के कोने-कोने में भ्रमण करते हैं। जहां भी जाते हैं एक चाबी उस स्थान के नाम से अपने रथ के साथ रख लेते हैं।

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