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रूस-यूक्रेन जंग के दो साल: 1 करोड़ से ज्यादा यूक्रेनी विस्थापित हुए, 10 हजार से ज्यादा की मौत

देवरिया। इजरायल पर फिलिस्तीन के हमले का शोर इतना ज्यादा हो गया कि दुनिया यूक्रेन पर रूस के हमले को भूल सी गई है। आज यूक्रेन पर बमों की बरसात के 2 साल हो रहे हैं। 24 फरवरी 2022 को ही रूस-यूक्रेन के बीच जंग छिड़ी थी। दुनिया की दूसरी महाशक्ति के हमले के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि कुछ ही दिन में यूक्रेन घुटने टेक देगा, लेकिन दुनिया के गेहूं के कटोरे ने यूं ही हार मानने से इंकार कर दिया। सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर यूक्रेनी नागरिकों ने बंदूक थाम ली। आबादी कम थी, तो तकनीक का सहारा लिया। ड्रोन से मुकाबला किया।



40 लाख यूक्रेनी नागरिकों को देश छोड़ना पड़ा, 30 हजार लापता

जंग अभी जारी है, लेकिन इस बीच यूक्रेन तबाह हो गया। 40 लाख यूक्रेनी नागरिकों को देश छोड़ना पड़ा और 60 लाख से ज्यादा को अपने ही देश में विस्थापित होकर शरणार्थी की जिंदगी जीनी पड़ रही है। 10 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई है, जबकि 18 हजार से ज्यादा नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यूक्रेन के 30 हजार लोग लापता हैं। परिवार वाले उनकी तलाश कर रहे हैं, लेकिन यह नहीं पता कि वे जिंदा हैं भी कि नहीं। दूसरी ओर यूक्रेन का दावा है कि 3 लाख से ज्यादा रूसी सैनिक इन दो साल की जंग में मारे गए हैं। हालांकि आंकड़े अभी साफ नहीं हैं।



अमेरिका ने जंग में यूक्रेन को अकेला छोड़ दिया
पुराने समझौते के हिसाब से अमेरिका ने किसी भी देश के हमले में यूक्रेन का साथ देने का वादा किया था, लेकिन इस युद्ध में उसने सिवाय मौखिक विरोध के ज्यादा कुछ नहीं किया। रूस की 500 से ज्यादा कंपनियों पर बैन लगाया। ईयू ने भी कई कंपनियों को बैन किया। यूक्रेन को आधुनिक हथियार और ड्रोन सप्लाई किए। सिर्फ कूटनीतिक मदद के भरोसे रूस का सामना करना यूक्रेन के लिए वास्तव में संभव नहीं था, लेकिन राष्ट्रपति व्लादोमिर जेलेंस्की (president Volodymyr Zelenskyy) के नेतृत्व में यूक्रेन ने जो जीजिविषा दिखाई वह इतिहास में बहुत ही कम देखने को मिलती है।



यूक्रेन के 1.75 करोड़ लोग राहत सामग्री पर जिंदा
इस लंबे युद्ध में रूस ने करीब आधे यूक्रेन पर कब्जा कर लिया था, लेकिन यूक्रेन ने 54% जमीन को रूसी कब्जे से वापस छुड़ा लिया। रूसी सेना को पीछे होने पर मजबूर कर दिया। हालांकि अब भी रूस के कब्जे में यूक्रेन की 18% जमीन है और जंग दरअसल यूक्रेन की ही जमीन पर लड़ी जा रही है। 4.30 करोड़ की आबादी वाले यूक्रेन के करीब पौने दो करोड़ लोग राहत सामग्री पर जिंदा हैं। उनके घर तबाह हो चुके हैं। वे नहीं जानते कि वे कब अपने घरों को लौट सकेंगे। लौटना हो भी सकेगा या नहीं।

किराए के सैनिक भर्ती कर रहा रूस

लगातार लंबे समय से चल रहे युद्ध की वजह से रूसी सैनिकों का मनोबल गिर गया है। रूस जबरन लोगों को सेना में भर्ती कर रहा है। इसलिए कई युवाओं ने देश छोड़ दिया। इसके बाद रूस ने युवाओं के देश छोड़ने पर रोक लगा दी। अब रूस किराए के सैनिक भर्ती कर रहा है। भारत और नेपाल तक से लोग अस्थाई तौर पर रूसी सेना में भर्ती होने जा रहे हैं। इसके लिए 2.5 लाख रुपए तक सैलरी मिल रही है। साथ ही रूस की सरकार नागरिकता देने का ऑफर भी दे रही है।

फोटो सौजन्य- एक्स

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