देवरिया न्यूज़

निजी कंपनियों के आने से स्पेस सेक्टर में नंबर वन बनेगा भारत, कस्टमाइज्ड और रीयूजेबल स्पेसक्राफ्ट बनाने पर हो रहा काम

देवरिया। भारत ने मिशन चंद्रयान-3 और सूर्य मिशन को सफलता पूर्वक पूरा करके साबित कर दिया है कि, भारत आने वाले कुछ सालों में अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में बहुत आगे निकलने वाला है। आज पूरी दुनिया में भारत की स्पेस सेक्टर की सफलताओं की चर्चा हो रही है। भारत ने साल 2035 तक अंतरिक्ष में अपना स्पेस स्टेशन और 2040 तक चांद पर अपने अंतरिक्ष यात्री भेजने का लक्ष्य रखा है। जिस तरह से भारत इस क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है जल्द ही भारत अंतरिक्ष विज्ञान के लिए अपने तय लक्ष्य को, तय समय तक हासिल कर ही लेगा। एक अच्छी बात यह भी है कि अब भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में निजी क्षेत्रों का योगदान भी तेजी से बढ़ रहा है।


भारत में 200 से ज्यादा स्पेस स्टार्टअप्स
पिछले साल आई डेलाइटे की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इस वक्त 200 से ज्यादा स्पेस स्टार्टअप्स हैं। यह विकास सिर्फ 10 साल में हुआ है। भारत में स्पेस सेक्टर की पहली कंपनी साल 2014 में शुरू हुई थी। अब तक इस सेक्टर के निजी क्षेत्र में 1.66 हजार करोड़ रुपए का निवेश भी हो चुका है। इन कंपनियों में हैदराबाद की स्काईरूट कंपनी अंतरिक्ष यात्रा को सस्ता बनाने की पहल की अगुवाई कर रही है। इसरो के पूर्व वैज्ञानिक पवन चंदाना इस कंपनी के सह संस्थापक हैं।


पवन चंदाना ने कंपनी के बारे में दी जानकारी
पवन चंदाना ने बताया कि- “हम रॉकेट को रियूजेबल बनाकर और बड़ी संख्या में रॉकेट निर्माण कर लागत कम करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि अंतरिक्ष का सफर सस्ता हो। हमने देश का पहला निजी क्षेत्र का रॉकेट साल 2022 में लॉन्च किया था। अब कंपनी 7 मंजिला ऊंची विक्रम-1 रॉकेट तैयार कर रही है।हम कस्टमाइज्ड स्पेसक्राफ्ट तैयार कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि हम दुनिया के टॉप-3 स्पेसक्राफ्ट लॉन्च करने वाली कंपनी के तौर पर जाने जाएं।” चंदाना कहते हैं कि- “हमारी स्पेस एक्स से कोई प्रतियोगिता नहीं है। उनकी फंडिंग अमेरिका की सरकार करती है। वही उनकी सबसे बड़ी ग्राहक भी है। उनकी जरूरतें और लक्ष्य अलग हैं। भारत का स्पेस बाजार जैसे-जैसे बढ़ेगा, निजी क्षेत्र की जरूरतें और बाजार भी बढ़ेगा।”


छोटे सैटेलाइट्स का 52.53 लाख करोड़ का बड़ा बाजार
एनालिटिक फर्म ब्राइस टेक की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022 में 96% छोटे स्पेसक्राफ्ट लॉन्च किए गए। साल 2013 में इनकी संख्या 61%थी। इनका बाजार तेजी से बढ़ रहा है। स्पेस सेक्टर का बाजार इस वक्त 52.53 लाख करोड़ रुपए का है।

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