देवरिया। महादेव का सबसे पावन और पवित्र त्योहार महाशिवरात्री इस साल 8 मार्च 2024 को आने वाला है। वैसे तो मान जाता है भोलेनाथ बहुत भोले हैं, भक्त अपनी श्रद्धा भक्ति के अनुसार पूजा करने उन्हें मना सकते हैं। महाशिवरात्री के दिन भक्त व्रत रखकर और शिव की प्रिय चीजें भांग, धतूरा, बेलपत्र, शमीपत्र, गंगाजल और दूध-दही अर्पित कर उन्हें खुश करने की कोशश करते हैं। लेकिन शिवरात्री के दिन चार प्रहर की शिव पूजा का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि चार प्रहर की सेवा और पूजा करने से शिव जी जरूर प्रसन्न होते हैं और भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं।
चार प्रहर में क्यों होती है शिवरात्री में पूजा
कहा जाता है कि शिवरात्री के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। भगवाव भोलेनाथ ने वैराग्य जीवन त्यागकर गृहस्थ जीवन अपनाया था। एक दूसरी पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव दिव्य ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। कहा जाता है भगवान शिव की पूजा चार प्रहर में करने से व्यक्ति जीवन के सभी पापों से मुक्त हो जाता है। धर्म,अर्थ काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। चार प्रहर की पूजा साल में एक बार शिवरात्री के दिन की जा सकती है।
चार प्रहर की पूजा का विधान
शिवरात्री के दिन चार पहर की पूजा शाम को प्रदोषकाल से शुरू होकर अगले दिन ब्रह्ममुहूर्त तक की जाती है। पहले प्रहर में दूध से शिव के ईशान स्वरूप को,दूसरे प्रहर में दही से अघोर स्वरूप को, तीसरे प्रहर में घी से वामदेव रूप को और चौथे प्रहर में शहद से सद्योजात स्वरूप का अभिषेक और पूजन किया जाता है। महाशिवरात्रि की रात महासिद्धिदायिनी है इसलिए इस महारात्रि में की गई पूजा-अर्चना विशेष पुण्य प्रदान करती है। अगर कोई शिवभक्त चार बार पूजन और अभिषेक न कर सके और पहले प्रहर में एक बार ही पूजन कर लें,तो भी उसको कष्टों से मुक्ति मिलती है। इस प्रकार शिवरात्री में शाम की प्रदोषकाल की पूजा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण और शुभ है।
शिवरात्री 2024 को पूजा का शुभ समय
इस साल महाशिवरात्रि 8 मार्च 2024 को है। चतुर्दशी तिथि 8 मार्च को रात 9 बजकर 58 मिनट पर लग जाएगी, जो कि 9 मार्च को शाम 6 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। चार प्रहर के विशिष्ट अभिषेक का समय 8 मार्च 2024 को शाम 06 बजकर 25 मिनट से सुबह 06 बजकर 37 मिनट तक रहेगा और शिवरात्रि में सबसे शुभ माने जाने वाला समय, महानिशीथकाल, 8 फरवरी को 9 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस काल में शिव आराधना, अभिषेक और पूजन विशेष पुण्य फलदायी माना जाता है।
इस तरह करें चार प्रहर का अभिषेक
चार प्रहर की पूजा में चार बार पूजा और अभिषेक करना होता है। हर बार पूर्वाभिमुख या उत्तराभिमुख होकर बैठ जाएं। प्रथम प्रहर में शिवजी का दूध से अभिषेक करें, दूसरे प्रहर में दही से अभिषेक करें, तीसरे प्रहर में घी से अभिषेक करें और अंतिम चौथे प्रहर में शहद से अभिषेक करें। अभिषेक करने के बाद वस्त्र, चंदन यज्ञोपवीत, आभूषण, सुगन्धित द्रव्य, बेलपत्र, कनेर, धतूरा, मदार, ऋतुपुष्प, नैवेद्य आदि अर्पित करें। अंत में धूप-दीप से आरती करें।