देवरिया। खुखुंदू में शहीदे आजम भगत सिंह सभागार में “भगत सिंह की विरासत और हमारे कार्यभार” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें शहीद भगत सिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर अमर शहीद राजगुरु सुखदेव और क्रांतिकारी कवि अवतार सिंह को भी श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर भगत सिंह के संगठन से जुड़े रहे खुखुंदू गांव के निवासी स्वर्गीय विश्वनाथ राय को भी याद किया गया जिन्होंने गुलाम भारत में आठ साल जेल में बिताया। इस अवसर पर बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि भगत सिंह ने धर्मनिरपेक्ष राजनीति को स्थापित किया और देसी विदेशी पूंजीपतियों की गठजोड़ के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने के लिए किसानों मजदूरों को संगठित होने का आह्वान किया था।आज के साम्प्रदायिक राजनीतिक वातावरण से भगत सिंह के विचारों के प्रकाश में ही मुक्ति पायी जा सकती है।

उपस्थित मेहमानों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए
इस संगोष्ठी की अध्यक्षता कृष्णगोविंद सिंह ने की। उन्होंने कहा कि- “भगत सिंह की ताकत उनके विचारों में निहित थी। धर्मनिरपेक्षता के मूल्य को उन्होंने भारत में स्थापित किया। उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट तानाशाही अपने अंतिम दौर में चल रही है, उसके विरोध की शक्तियां संगठित हो कर शीघ्र ही भगत सिंह के सपनों के समतावादी समाजवादी समाज का करेंगी। वहीं राष्ट्रीय समानता दल के प्रदेश अध्यक्ष संजय दीप कुशवाहा ने कहा कि न्याय, स्वतंत्रता और निडरता ही सरदार भगत सिंह की विरासत है।

“भगत सिंह के वैज्ञानिक नजरिए का अध्ययन आवश्यक”
डॉ व्यास मुनि तिवारी ने ने कहा कि आज जब सत्ता द्वारा अंधविश्वास को बढ़ावा दिया जा रहा है ऐसे में भगत सिंह के वैज्ञानिक नजरिए का अध्ययन आवश्यक है। किसान नेता कामरेड वीरेंद्र सिंह ने कहा कि भगत सिंह ने किसानों और मजदूरों के नेताओं के हाथ में सत्ता की बागडोर सौंपने की बात की थी।आज किसानों मजदूरों की सत्ता स्थापित कर ही हम उनके सपनों को पूरा कर सकते हैं।

समान शिक्षा आंदोलन, उत्तर प्रदेश के सह संयोजक डॉक्टर चतुरानन ओझा ने कहा कि सबके लिए एक समान, पूरी तरह मुफ्त और वैज्ञानिक नजरिए की शिक्षा प्रणाली की स्थापना के लिए भगत सिंह के विचारों के साथ खड़ा होना और किसानों मजदूरों के संगठित प्रतिरोध को विकसित करना आज की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज की दुखद स्थिति है कि देश की सत्ता में वे लोग स्थापित हैं जो अंग्रेजी राज के समर्थक थे और स्वतंत्रता आंदोलन के विरोधी थे यही कारण है कि आज सभी स्तर पर जनता की जरूरत को कुचला जा रहा है और जन भावनाओं की उपेक्षा की जा रही है

गोष्ठी में पूर्व जिला पंचायत सदस्य उपेंद्र भारती पत्रकार अजय शर्मा छात्र नेता अंकित दीक्षित पारस कुमार विश्वकर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर चतुरानन ओझा ने किया।