देवरिया: सिविल सेवा दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोक सेवकों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सिविल सेवकों से कहा कि आज पूरे विश्व की अपेक्षाएं भारत से बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। दुनियाभर के एक्सपर्ट्स, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं कह रही हैं कि भारत का समय आ गया है। आज मैं भारत की ब्यूरोक्रेसी से, भारत के हर सरकारी कर्मचारी से, चाहे वो राज्य सरकार में हो या केंद्र सरकार में, एक आग्रह करना चाहता हूं कि कर्तव्य हमारे लिए विकल्प नहीं बल्कि संकल्प है। इस वर्ष 18वां सिविल सेवा दिवस मनाया जा रहा है, जिसकी थीम है – ‘विकसित भारत – नागरिकों को सशक्त करना और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना’।
देश को लोकसेवकों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 9 वर्षों में भारत आज जहां पहुंचा है, उसने हमारे देश को बहुत ऊंची छलांग के लिए तैयार कर दिया है। देश में ब्यूरोक्रेसी वही है, अधिकारी-कर्मचारी वही हैं लेकिन परिणाम बदल गए हैं। बीते वर्ष 15 अगस्त को मैंने लाल किले से देश के सामने ‘पंच प्राणों’ का आह्वान किया था। विकसित भारत के निर्माण का विराट लक्ष्य हो, गुलामी की हर सोच से मुक्ति हो, भारत की विरासत पर गर्व की भावना हो, देश की एकता और एकजुटता को निरंतर सशक्त करना हो और अपने कर्तव्यों को सर्वोपरि रखना हो, इन पंच प्राणों की प्रेरणा से जो ऊर्जा निकलेगी, वो हमारे देश को वो ऊंचाई देगी, जिसका वो हमेशा से हकदार रहा है।

आपके प्रयासों से सिस्टम बदला: पीएम
पीएम मोदी ने सिविल सेवकों से कहा कि आज देश और आप सभी के प्रयासों से सिस्टम बदला है और देश के करीब करीब 3 लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचे हैं। आप सभी इसके लिए अभिनन्दन के अधिकारी हैं। आज ये पैसे गरीबों के काम आ रहे हैं, उनके जीवन को आसान बना रहे हैं। आज चुनौती ये नहीं है कि आप कितने एफीशिएंट हैं, चुनौती ये तय करने में है कि जहां जो डिफिशिएंसी है वो कैसे दूर होगी।
अब सोच कि सरकार सबके लिए काम करेगी: पीएम
पीएम ने कहा कि पहले यह सोच थी कि सरकार सबकुछ करेगी लेकिन अब सोच यह है कि सरकार सबके लिए करेगी। अब सरकार सबके लिए काम करने की भावना के साथ समय और साधन का कुशलतापूर्वक उपयोग कर रही है। आज की सरकार का ध्येय है nation first, citizen first और आज की सरकार की प्राथमिकता है- वंचितों को वरीयता। आज सरकार आकांक्षी ब्लॉक तक जा रही है और आज की सरकार देश के सीमावर्ती गांवों को आखिरी गांव ना मान कर उन्हें फर्स्ट विलेज मान कर काम कर रही है।

लोक सेवकों को मिला पुरस्कार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवाचार के अंतर्गत राष्ट्रीय कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय से केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण को लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार 2022 दिया। उत्तर प्रदेश के 2 आईएएस अधिकारियों को पीएम अवार्ड मिला है। रामपुर के कलेक्टर रविंद्र मांदड और चित्रकूट के डीएम अभिषेक आनंद की पहल ने पूरे देश के सामने नजीर पेश की है। आईएएस रविंद्र को जिले को कुपोषण के दंश से मुक्ति दिलाने तथा डीएम अभिषेक को स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार मिला है।
क्यों मनाया जाता है सिविल सर्विस डे, कब हुई थी शुरुआत ?
प्रत्येक वर्ष 21 अप्रैल को मनाया जाने वाला सर्विस डे उन लोक सेवकों को समर्पित होता है, जो देश की प्रगति और नीति निर्माण में बड़ी भूमिका निभाते हैं। 21 अप्रैल 1947 में गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने अखिल भारतीय सेवाओं का उद्घाटन किया था और सिविल सर्विस के पहले बैच को संबोधित किया था। उन्होंने पहली बार सिविल सेवकों/सेवाओं को “भारत का स्टील फ्रेम” कहा था। भारत सरकार ने 21 अप्रैल 2006 को राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस के रूप में नामित किया था।
• भारत में लोक सेवायें औपचारिक रूप से सन् 1854 से प्रारंभ हुईं।
• वर्ष 1858 में ICS (इंडियन सिविल सर्विसेस) की नींव रखी गई थी। सत्येंद्रनाथ टैगोर पहले ICS अधिकारी थे।
• एमपी कैडर के आईएएस अफसर कृष्ण गोपाल तिवारी भारत के पहले दृष्टिबाधित कलेक्टर हैं।