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पीएम मोदी ने किया UAE में भव्य हिंदू मंदिर का लोकार्पण, जानिए मंदिर की खासियत

देवरिया। बुधवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने आबू धाबी में नवनिर्मित ऐतिहासिक श्रीअक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) का लोकार्पण किया। इसी के साथ मंदिर के उद्घाटन के लिए 10 फरवरी से चल रहे ‘सद्भावना महोत्सव’ का भी समापन हो गया। बुधवार को ही मंदिर में मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा का भी समारोह रखा गया था। यह मंदिर UAE में बना पहला हिंदू मंदिर है। मंदिर की भव्यता और वास्तुकला बेहद खूबसूरत और अर्थपूर्ण है। आइए जानते हैं इस मंदिर क्या-क्या खास बात है।



700 करोड़ की लागत से तैयार हुआ है मंदिर

इस भव्य मंदिर का निर्माण करीब 27 एकड़ जमीन में 700 करोड़ रुपये की लागत से हुआ है। यूएई ने हिंदू मंदिर बनाने के लिए 27 एकड़ जमीन दान में दी थी। एक अनुमान के अनुसार, मंदिर को बनाने में 18 लाख ईंटों का इस्तेमाल किया गया है। मंदिर की दीवार पर सफेद पत्थर को तराश कर कई देवी देवताओं की मूर्तियां बनाई गई हैं। मंदिर की नक्काशी के लिए राजस्थान के बलुआ पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है।


7 शिखर हैं 7 अमीरात का प्रतीक

इस मंदिर में कुल 7 शिखर का निर्माण किया गया है। मंदिर प्राधिकारियों के मुताबिक, बनाए गए 7 शिखर यूएई के 7 अमीरात का प्रतिनिधित्व करते हैं। बीएपीएस के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रमुख स्वामी ब्रह्मविहरिदास ने बताया कि 7 शिखरों पर भगवान राम, भगवान शिव, भगवान जगन्नाथ, भगवान कृष्ण, भगवान स्वामीनारायण, तिरुपति बालाजी और भगवान अयप्पा की मूर्तियां हैं। 7 शिखर यूएई के 7 अमीरात का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा- “7 शिखर 7 अहम देवताओं को समर्पित हैं। ये शिखर संस्कृतियों और धर्मों के परस्पर संबंध को रेखांकित करते हैं। आम तौर पर हमारे मंदिरों में या तो एक शिखर होता है या तीन या पांच शिखर होते हैं, लेकिन यहां सात शिखर सात अमीरात की एकता के प्रति हमारा आभार व्यक्त करते हैं। इन शिखरों का उद्देश्य बहुसांस्कृतिक परिदृश्य में एकता और सद्भाव को बढ़ावा देना है। कुल 108 फुट ऊंचा यह मंदिर क्षेत्र में विविध समुदायों के सांस्कृतिक एकीकरण का मार्ग प्रशस्त करेगा।”



402 स्तंभों का हुआ है निर्माण

इस भव्य मंदिर को बनाने का विचार उसी वक्त कर लिया गया था, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2015 में पहली बार यूएई आए थे। इस मंदिर को बनने में 402 स्तंभों का इस्तेमाल किया गया है। मंदिर की ऊंचाई 32.92 मीटर है। मंदिर में भारतीय धर्म शास्त्रों के प्रतीक हाथी, ऊंट और शेर के साथ-साथ यूएई के राष्ट्रीय पक्षी बाज को भी स्थान दिया गया है। यूएई में ऊंट को दृढ़ता, प्रतिबद्धता और धीरज का प्रतीक माना जाता है।


भारत और यूएई के साथ इन देशों की सभ्यता को किया गया शामिल
मंदिर निर्माण में केवल भारत से रामायण और महाभारत के अंश और पात्रों को ही जगह नहीं दी गई है बल्की माया, जो कि मैक्सिको की महत्वपूर्ण सभ्यता है, एज्टेक जो मध्य अमेरिकी सभ्यता है, मिस्र, अरबी, यूरोपीय, चीनी और अफ्रीकी सभ्यताओं की पौराणिक कहानियों को भी स्थान दिया गया है। मंदिर की बाहरी दीवारों को बनाने के लिए भारत के बलुआ पत्थर का इस्तेमाल किया गया है और अंदर की दीवारों के लिए सफेद इतालवी संगमरमर का इस्तेमाल हुआ है।

मंदिर में नहीं हुआ है लोहे, स्टील या सीमेंट का उपयोग

इस मंदिर को बनवाने में किसी भी स्टील, लोहे या फिर सीमेंट का प्रयोग नहीं किया गया है. सिर्फ पत्थरों के प्रयोग से इस मंदिर को बनाया गया है। मंदिर की नींव में 100 सेंसर का प्रयोग किया गया है और पूरे मंदिर में कुल मिलाकर 350 से अधिक सेंसर का प्रयोग किया गया है। इन सेंसर की वजह से भूकंप, तापमान और दबाव की जानकारी मिलती रहेगी। मंदिर निर्माण में प्राकृतिक सामग्रियों के उपयोग पर अधिक जोर दिया गया है। ऐसा दावा किया गया है कि यह मंदिर एक हजार साल तक बिना किसी नुकसान के खड़ा रहेगा।

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