देवरिया। ब्रिटेन में किए गए एक सर्वे के मुताबिक, वहां महंगाई का असर अब बच्चों की पढ़ाई तक पहुंच गया है। यहां हर तीसरा पैरेंट्स प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे अपने बच्चों की फीस नहीं भर पा रहा है। इसलिए वे अपने बच्चों को अब ऐसे स्कूलों में भेज रहे हैं, जो बहुत अच्छे नहीं माने जाते, लेकिन सस्ते हैं। चैरिटी पैरेंटकाइंड के सर्वे के मुताबिक, अगर पैरेंट्स किसी तरह स्कूल की फीस भर भी पा रहे हैं तो स्कूल ट्रिप्स, यूनिफॉर्म्स, कला और संगीत जैसी गतिविधियों के नाम पर जो पैसे स्कूल वसूल रहे हैं, उन्हें चुकाने में पैरेंट्स की कमाई नाकाफी है। ब्रिटेन में करीब 28 लाख बच्चों की पढ़ाई से समझौता करना पड़ रहा है।
बच्चों की पढ़ाई के लिए समझौता कर रहे पैरेंट्स
यूगोव के नेशनल पैरेंट सर्वे के अनुसार, ब्रिटेन के 25% माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्चा उठाने के लिए अपनी दूसरी जरूरतों से समझौता कर रहे हैं। बावजूद इसके उन्हें ऐसा नहीं लगता कि वे लंबे समय तक अपने बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन दे सकेंगे। कम आय वाले लोग जिनके बच्चों को स्कूल में मुफ्त खाने की व्यवस्था है, उनमें से भी आधे लोग इस स्थिति में नहीं हैं कि आसानी से अपने बच्चे की फीस दे सकें।
बच्चों में पनप रही हीन भावना
इस अध्ययन में यह भी पता चला कि बच्चों का स्कूलों में मन नहीं लग रहा है। इंडिपेंडेंट स्कूल काउंसिल की मुख्य कार्यकारी जुली रॉबिंसन कहती हैं- मां-बाप अपने बच्चों के लिए सबसे अच्छे स्कूल का चुनाव आर्थिक मजबूरियों में नहीं कर पा रहे हैं। चैरिटी पैरेंटकाइंड के सर्वे के मुताबिक से उन्हें कमतर आंके जाने वाले स्कूलों में भेजने पर उनमें हीन भावना भी आ रही है। वे कहती हैं- हम समझते हैं कि महंगाई की वजह से लोगों की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है। स्कूलों ने भी परिवारों पर पड़ने वाले प्रेशर को कम करने की कोशिश की है। स्कूलों ने 10 हजार करोड़ से ज्यादा खर्चे कम किए हैं, जिनका बोझ पैरेंट्स पर आता। शोध में यह भी पता चला कि आधे से ज्यादा पैरेंट्स को लगता है कि उनके बच्चे उतनी बेहतर जिंदगी भी नहीं जी पाएंगे जैसी वे जी रहे हैं। हालांकि 40% लोगों को लगता है कि उनके बच्चे उनसे बेहतर जिंदगी जीएंगे। लेकिन करीब 52% पैरेंट्स ऐसे भी हैं, जिन्हें लगता है कि उनके बच्चों के पास करियर के ज्यादा बेहतर मौके नहीं होंगे।
पूर्व शिक्षक और चैरिटी के मुख्य कार्यकारी जैशन एल्सम कहते हैं- यह सर्वे स्कूल और राजनेताओं के लिए चेतावनी है। मिडिल क्लास के जो लोग बेहतर जिंदगी जी रहे थे, वे अब अपने बच्चों की फीस तक नहीं भर पा रहे हैं। वेतन महंगाई के अनुरूप नहीं बढ़ा है। इससे संभव है कि बच्चों की शिक्षा ही खतरे में पड़ जाए।
स्कूल फीस पर वैट लगाने का प्रस्ताव
ब्रिटेन की लेबर पार्टी ने प्राइवेट स्कूलों की फीस पर वैट लगाने की घोषणा की है। अगर लेबर पार्टी जीतती है तो स्कूलों की फीस पर वैट लगते ही पहले से ही बोझ बने स्कूलों की फीस और महंगी हो जाएगी। जो सालाना फीस अभी 15 लाख रुपए है, वह बढ़कर 19 लाख रुपए हो जाएगी।
