देवरिया न्यूज़

Mahakumbh 2025: महाकुंभ की शोभा बढ़ा रहे प्रवासी पक्षी

देवरिया। प्रयागराज में संगम किनारे बसा महाकुंभ नगर अपने आप में अद्भुत और आध्यात्मिक अनुभव देता है। यहां आने वाला हर एक श्रद्धालु पूरी तरह से भक्तिमय हो जाता है। कुंभ में देश ही नहीं विदेशों से भी श्रद्धालु डुबकी लगाने पहुंच रहे हैं। कुंभ अपने आप में एक बड़ा आयोजन है और इस आयोजन की शोभा बढ़ा रहे हैं विदेशों से पहुंचे प्रवासी पक्षी। श्रद्धालुओं के आस-पास मंडराते ये सुंदर पक्षी कुंभ में अलग ही आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

अक्टूबर से पहुंचने लगते हैं प्रयागराज

ये प्रवासी पक्षी हर साल अक्टूबर के आखिरी हफ्ते से पहुंचने शुरु हो जाते हैं। पूरे ठंड ये संगम पर और आसपास रहते हैं। यहां पर ये पक्षी लगभग 5 महीने रहते हैं और अप्रैल में वापस चले जाते हैं। यहां ये पक्षी प्रजनन के लिए आते हैं। इन प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से संगम का तट पूरे ठंड गुलजार रहता है। इन पक्षियों की कलरव ने कुंभ की खूबसूरती को और भी बढ़ा दी है।

कई दुर्लभ प्रजाति के पक्षी देखे जा सकते हैं

इन प्रवासी पक्षियों में लुप्तप्राय इंडियन स्कीमर के जोड़े, तेजी से उड़ने के लिए मशहूर पेरेग्रीन फाल्कन, साइबेरियन सारस और ब्लैक क्रेन जैसे पक्षियों की 90 से ज्यादा प्रजाति शामिल है। ये पक्षी ज्यादातर संगम पर ही नजर आ जाते हैं। कुछ संगम किनारे रेत के टिलों पर रहते हैं और वहीं अंडे देतेहैं। हर साल आने की वजह से नाविकों के साथ इनका अलग ही तालमेल देखने को मिलता है। नाविकों के आवाज देने पर ये तुरंत ही उनके पास आ जाते हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ से भी ये पक्षी जरा भी नहीं घबराते और दाना खाने उनकी नाव के आस-पास ही मंडराते रहते हैं।

वाइल्ड लाइफ टीम कर रही निगरानी

ये विदेशी मेहमान हर साल संगम पर अपने तय समय पर पहुंच जाते हैं। प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने में इन पक्षियों की बड़ी भूमिका होती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश वाइल्ड लाइफ की टीम इन पक्षियों की पूरी तरह से निगरानी करती है। वन विभाग और वाइल्ड लाइफ की टीम पक्षियों के रहन सहन का अध्ययन करती है। साथ ही इनकी संख्या की भी गिनती कर रिकॉर्ड रखती है।

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