देवरिया। ASI सर्वे के मामले में शुक्रवार को वाराणसी की जिला जज की कोर्ट ने वजूखाने को छोड़कर पूरे परिसर का सर्वे करने का आदेश जारी किया था और टीम को 4 अगस्त तक रिपोर्ट पेश करने का आदेश भी दिया था। अब इस मामले में एक नया मोड़ आ गया है। जिला जज के इस आदेश के खिलाफ अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की याचिका दाखिल की है।
सर्वे के आदेश को बताया कोर्ट की अवमानना
इंतेजामिया कमेटी के महासचिव सैयद मोहम्मद यासीन ने कहा कि- “12 मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने के फव्वारे की कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक सर्वेक्षण का आदेश दिया था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। अब उसके अगल-बगल के क्षेत्र का एएसआई से सर्वे का आदेश जिला अदालत ने दिया है। यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना है। सुप्रीम कोर्ट में हमारे दो वकीलों ने एसएलपी दाखिल की है। इस मामले को हमने सीजेआई के अदालत में सुनवाई करने के लिए याचिका दी है। सर्वे के आदेश के खिलाफ हमारी याचिका एसएलपी के साथ क्लब कर दी गयी है और अब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ इस मामले पर सोमवार को सुनवाई करेंगे।”
इधर ASI को सर्वे का आदेश सौंपने की तैयारी में हिंदू पक्ष
हिंदू पक्ष सोमवार को ASI को कोर्ट का वो आदेश सौंपने की तैयारी में है, जो जिला कोर्ट ने दिया है। हिंदू पक्ष सोमवार को सारनाथ स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के कार्यालय में जाकर आदेश की कॉपी सौंपेगा। हिंदू पक्ष के वकील ने बताया कि जरूरी औपचारिकताएं शनिवार को पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने कहा एएसआई से सर्वे का काम जल्द से जल्द पूरा कर रिपोर्ट सौंपने की मांग की जाएगी।
जिला कोर्ट से खारिज हो चुकी है मुस्लिम पक्ष की याचिका
जिला कोर्ट से मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज हो चुकी है। मुस्लिम पक्ष ने सर्वे पर रोक लगाने की याचिका दाखिल की थी। इस मामले में शुक्रवार को कोर्ट में करीब डेढ़ घंटे तक बहस हुई। मामले की सुनवाई जिला जज डॉक्टर अजय कृष्णा विश्वेश की कोर्ट में हुई। हिंदू पक्ष ने शिवलिंग का भी सर्वे करने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इस मामले को विचाराधीन रखा है। इसकी सुनवाई है 29 अगस्त को होगी।
हिंदू पक्ष ने क्यों की थी सर्वे की मांग
हिंदू पक्ष का कहना है कि ज्ञानवापी मस्जिद मंदिर का ही हिस्सा है। इसके लिए उन्होंने कई बड़े साक्ष्य मिलने की भी बात कही थी। हिंदू पक्ष का कहना है कि मुकदमा सिर्फ मां श्रृंगार गौरी के दर्शन-पूजन के लिए दाखिल किए गए हैं जो हमारा अधिकार है। मंदिर विवादित ज्ञानवापी परिसर के पीछे है। वहां पर निर्मित मस्जिद अवैध तरीके से बनाया गया है। वक्फ बोर्ड ये तय नहीं कर सकता कि महादेव की पूजा कहां होगी। मां श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा देश की आजादी के दिन से लेकर 1993 तक होती थी। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर एक्ट में आराजी नंबर-9130 देवता की जगह मानी गई है। सिविल प्रक्रिया संहिता में संपत्ति का मालिकाना हक खसरा या चौहद्दी से ही होता है। ज्ञानवापी मस्जिद के वजू खाने में मिले आकार को शिवलिंग के जैसा ही माना जा रहा है। जिसे वक्फ बोर्ड फव्वारा बता रहा है, लेकिन उसमें किसी प्रकार की पाइप या पानी निकलने की जगह नहीं मिली थी।