देवरिया। महाकुंभ 2025, (Mahakumbh 2025)जिसका शुभारंभ 13 जनवरी से हो चुका है 26 फरवरी तक चलने वाला है। 14 जनवरी को महाकुंभ का पहला शाही स्नान भी संपन्न हो चुका है। इस बार कुंभ को भव्य और डिजिटल बनाने में पूरा जोर दिया जा रह है और उतना ही इसे प्लास्टिक फ्री और ग्रीन बनाने के लिए भी तत्तपरता दिखाई जा रही है। कई समाज सेवी संस्थाएं इस दिशा में काम कर रही हैं। जिसका परिणाम कुंभ (Mahakumbh 2025)में देखने को भी मिल रहा है।
RSS का “एक थाली एक थैला” अभियान
एक थाली, एक थैला अभियान कुंभ के शुरु होने से पहले ही चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत प्रयागराज (Mahakumbh 2025) में आने वाले श्रद्धालुओं को एक-एक थाली और एक कपड़े का थैला दिया जा रहा है। जिससे की उन्हें खाने के लिए प्लास्टिक के प्लेट्स और सामान रखने के लिए किसी तरह की प्लास्टिक थैलियों का इस्तेमाल ना करना पड़े। इसके साथ ही कुंभ (Mahakumbh 2025)में आने वाले लोगों को कुंभ को पूरी तरह से प्लास्टिक फ्री और ग्रीन कुंभ बनाने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है।
देशभर से जमा की गई हैं थालियां
इस अभियान के लिए RSS ने कई राज्यों में अभियान चलाकर थैले और थालियां इकट्ठा की है। लोगों ने अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार थालियों और थैलों का दान किया है। इस अभियान में सबसे ज्यादा जागरूकता दिल्ली, राजस्थान, गुजरात और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में देखने को मिला। यहां के कुछ इलाके ऐसे थे जहां की बर्तन दुकानों में ही थालियों का स्टॉक खत्म हो गया था। जमा हुई थालियों को पहले ही मेला क्षेत्र में पहुंचा दिया गया था। इन थालियों को अखाड़ों को वितरित किया गया ताकी उन्हें डिस्पोजेबल बर्तनों का उपयोग ना करना पड़े।
मेला क्षेत्र में चल रही हाइड्रोजन और ई बसें
महाकुंभ में सिर्फ प्लास्टिक से हो रहे प्रदूषण को लेकर ही जागरूकता नहीं दिखाई जा रही। बल्की ई बसें और हाइड्रोजन बसों का संचालन करके भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा रहा है। कुंभ में पहली बार मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी और NTPC की साझेदारी से हाइड्रोजन बसों का संचालन किया जा रहा है। इन बसों का उपयोग यात्रियों कों मेला क्षेत्र से लाने, ले जाने के लिए किया जा रहा है। किसी बड़े इवेंट में पहली बार सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा है।
क्या होती हैं हाइड्रोडन बसें?
हाइड्रोजन बसें सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी का एक बेहतरीन उदाहरण है। इन बसों को सबसे पहले लेह में शुरु किया गया था। हाइड्रोजन बसें NTPC के ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी प्रोजक्ट पर आधारित हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत NTPCC ने हाइड्रोजन फ्यूल स्टेशन, सोलर पावर प्लांट और 5 फ्यूल सेल बसों को तैयार किया है। इस बसों की खासियत है कि ये एक बार हाइड्रोजन भरने पर 300 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकते हैं। ये बसें बहुत ज्यादा ठंडे टेम्प्रेचर यानी माइनस ट्रेम्प्रेचर में भी काम कर सकती हैं।
ये भी पढ़ें- https://newsdeoria.com/prayagraj-became-the-worlds-most-populated-city-on-the-day-of-amrit-snan/