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राष्ट्रपति भवन में पहली बार महिला ADC नियुक्त, यशस्वी सोलंकी ने रचा इतिहास

देवरियादेश के सर्वोच्च कार्यालय माने जाने वाले राष्ट्रपति भवन में एक बड़ा और सराहनीय बदलाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां ऑपरेशन सिंदूर जैसी बड़ी जिम्मेदारी को कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने संभाला और अंजाम तक पहुंचाया। वहीं अब राष्ट्रपति भवन में पहली महिला ADC की नियुक्ति की गई है। पहली बार लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी एक महिला ADC के रूप में राष्ट्रपति भवन में नियुक्त किया गया है।

सिर्फ 27 साल की उम्र में मिली बड़ी जिम्मेदारी

9 मई को लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी, जो कि मात्र 27 वर्ष की हैं, भारत की पहली महिला एडीसी (Aide-de-Camp) बनीं। आमतौर पर राष्ट्रपति के साथ पांच एडीसी होते हैं – जिनमें से तीन थल सेना, एक नौसेना और एक वायुसेना से होते हैं। हालांकि अब तक किसी महिला अधिकारी को यह ज़िम्मेदारी नहीं सौंपी गई थी

महिला सशक्तिकरण की तरफ पहल

यह बदलाव राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की महिला सशक्तिकरण की सोच का परिणाम है। उन्होंने हमेशा महिलाओं को आगे लाने की बात की है और इस ऐतिहासिक नियुक्ति ने उनकी सोच को हकीकत बना दिया। अपनी नियुक्ति के बाद यशस्वी सोलंकी ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें इतना बड़ा अवसर मिलेगा। राष्ट्रपति भवन में यह बदलाव महिलाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गया है। अब यशस्वी राष्ट्रपति के साथ सभी आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल रहेंगी और सेना व सरकार के बीच समन्वय का भी कार्य करेंगी।

3 महिला अधिकारी हुई थीं शॉर्टलिस्ट

दरअसल, नौसेना के एक मौजूदा एडीसी का कार्यकाल पूरा होने वाला था, जिसके चलते नए एडीसी की आवश्यकता थी। इसके लिए तीन महिला नौसेना अधिकारियों को शॉर्टलिस्ट किया गया और उन्हें राष्ट्रपति भवन में 15 दिनों तक मूल्यांकन के लिए रखा गया। राष्ट्रपति ने खुद उनका इंटरव्यू लिया। इन सभी परीक्षणों में शारीरिक क्षमता, निर्णय लेने की बुद्धिमत्ता और परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की क्षमता का आकलन किया गया। गुजरात के भरूच से आने वाली यशस्वी सोलंकी को अप्रैल में इस पद के लिए चुना गया। इसके बाद उन्होंने एक महीने का प्रशिक्षण लिया और अंततः 9 मई को राष्ट्रपति मुर्मू से नियुक्ति पत्र प्राप्त किया।

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