देवरिया। रंगों का त्यौहार होली को आने में अब कुछ ही दिन बचे हैं। हिंदू धर्म में होली के त्यौहार को बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को प्रदोष काल में होलिका दहन होता है। इस बार होलिका दहन 7 मार्च को होगा और उसके अगले दिन यानि चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को होली खेली जाती है। इस साल रंगों वाली होली 8 मार्च खेली जाएगी।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
होलिका दहन पर भद्रा की स्थिति पर एक बार विचार जरूर किया जाता है। इस बार होलिका दहन के समय भद्रा नहीं है। बता दें कि भद्रा काल में शुभ कार्य जैसे मुंडन, विवाह, गृह प्रवेश, तीर्थ स्थलों का भ्रमण, संपत्ति की खरीदारी या व्यापार की शुरूआत आदि मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। ज्योतिषियों के मुताबिक, होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 6.24 बजे से रात 8.51 बजे तक रहेगा। इस बार होलिका दहन 2 घंटे 27 मिनट तक रहेगी।
यहां यह बताते चलें कि होलिका का पर्व होलिका और भक्त प्रह्लाद से जुड़ा हुआ है। एक कथा प्रचलित है कि राक्षसों के राजा हिरयण्यकश्यप देवताओं का शत्रु था, लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकश्यप के बहुत समझाने पर भी जब प्रह्लाद ने भगवान विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी तो वह प्रह्लाद को यातना देने लगा। इस यातना के बावजूद प्रह्लाद ने नहीं माना। ऐसे में हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठने को कहा, क्योंकि होलिका को अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था। जब होलिका जब प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठी तो वह जल गई और प्रह्लाद बच गया। तभी से ये पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाने लगा।
होलिक दहन की पूजा विधि
- होलिका जलाने के लिए लकड़ी इक्ठ्ठा की जाती है , जहां पर पूजा की जाती है।
- होलिका में जलाने वाले लकड़ी पर धागे को बांध कर पूजा की जाती है।
- इसके बाद कूमकूम, गंगा जल और माला फूल चढ़ाकर पूजा की जाती है। फिर अग्नि के चारों ओर फेरे लगाते हैं।