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परिवार आधारित बाल संरक्षण पर कार्यक्रम, श्रीलंका में भी अपनाई जाएगी परिवार आधारित देखभाल की अवधारणाएं: नील बनडारा

राजस्थान के उदयपुर में चिल्ड्रेन इमरजेंसी रीलिफ इंटरनेशनल CERI, यूनिसेफ श्रीलंका और यूनिसेफ इंडिया के साथ मिलकर एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। कार्यक्रम को फोस्टर केयर के बच्चों के संरक्षण और उनसे जुड़ी योजनाओं के बारे में चर्चा करने के लिए आयोजित किया गया था।

भारत आए श्रीलंका के महिला एवं बाल मामले और सामाजिक अधिकारिता मंत्रालय के सचिव नील बनडारा कार्यक्रम में शामिल हुए और अपने अनुभव भी साझा किए। नील बनडारा ने कहा कि “यह श्रीलंका में परिवार-आधारित देखभाल अवधारणाओं को लागू करने का एक अच्छा अवसर होगा। हम यहां बच्चों और परिवारों के बेहतर भविष्य की कामना करते हैं। हम इस महत्वपूर्ण कार्य को श्रीलंका में क्रियांवित करने के लिए उत्साहित हैं।” नील बनडारा के साथ कार्यक्रम में शिरकत करने श्रीलंका से 10 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल भारत आया हुआ था। कार्यक्रम में आये श्रीलंका के प्रतिभागियों ने परिवार-आधारित देखभाल मॉडल पर राजस्थान के नवाचार की सराहना की। राजस्थान में परिवार-आधारित देखभाल के लिए कई योजनाएं चल रही हैं जैसे- वात्सल्य योजना, गोराधाय, समर्थ, उत्कर्ष और पालनहार योजना।


कार्यक्रम की अध्यक्षता उदयपुर के जिला कलेक्टर ताराचंद मीना ने की। उन्होने कहा कि “उम्मीद है हमारे काम से श्रीलंका सरकार को फायदा होगा और हम उनके अनुभवों से सीखेंगे”। वहीं चिल्ड्रेन इमरजेंसी रीलिफ इंटरनेशनल, सेरी (CERI) के राष्ट्रीय बाल संरक्षण सलाहकार श्रीमान देवाशीष मिश्रा ने कहा कि “पूरे भारत में राजस्थान राज्य के बाल संरक्षण के नवाचार प्रशंसनीय है। राज्य के बजट में शामिल परिवार-आधारित देखभाल से सम्बन्धित योजनाएं राज्य के बच्चों के देखभाल के लिए एक बेहतरीन पहल है”। उन्होंने वर्तमान परिस्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि “बाल देखरेख संस्थाओं में सभी बच्चे अनाथ नहीं हैं, इन बच्चों में कई बच्चों के कम से कम एक जैविक माता या पिता परिवार में मौजूद हैं लेकिन गरीबी के कारण परिवार के प्यार और सुरक्षा से अलग हो गए हैं”।


राजस्थान बाल आयोग के सदस्य, श्रीमान शैलेन्द्र पांडया ने परिवार आधारित सेवाओं के महत्व को बताते हुए कहा कि “इसके अन्तर्गत हम बाल संरक्षण से जुड़ी अन्य समस्याओं का समाधान निकाल सकते हैं। यूनिसेफ बाल संरक्षण विशेषज्ञ श्रीमान संजय निराला ने राजस्थान और उदयपुर में परिवार-आधारित देखभाल के अभिनव कार्यों का सारांश दिया। फोस्टर केयर सोसायटी की अध्यक्षा डॉ शिल्पा मेहता ने भी अपने 8 वर्षों के अनुभवों को प्रतिनिधि मंडल के साथ साझा किया। उन्होने बताया कि अब तक उदयपुर और बांसवाडा जिले को मिलाकर 24 बच्चों को वात्सल्य योजना के तहत फोस्टर केयर से लाभान्वित किया जा चुका है।


कार्यक्रम का संचालन फोस्टर केयर सोसायटी बोर्ड की सदस्य अनुराधा राय ने किया और समापन करते हुए उदयपुर DSP चेतना भाटी ने कहा कि कि “मैं एक छोटे से गांव के गरीब से थी, लेकिन परिवार के साथ रहने और उनके सहयोग से सफल हो सकी। मेरा काम हर महिला और बच्चे की सुरक्षा करना है। मुझे उम्मीद है कि हम एक-दूसरे से सीख सकते हैं और गुणवत्तापूर्ण काम कर सकते हैं।”

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