India to Fight and Win Future Wars with AI, Digital Networks and Data: Army’s 2026 Roadmap चीन या पाकिस्तान से हुई अगली जंग तो AI, Digital Network और Data से लड़ेगा और जीतेगा भारत

नई दिल्ली। दुनिया बदल रही है और इसके साथ ही शक्ति का स्वरूप भी। कभी लोहा शक्ति का प्रतीक माना जाता था। इतना प्रभावशाली प्रतीक कि ‘लोहा लेना’ मुहावरा तक बन गया। लोहे की खोज की वजह से ही मगध महाजनपद ने देश का पहला साम्राज्य बनाया और पहली बार पूरे भारत को एक केंद्रीय शासन में लेकर आया। लोहे की जगह बारूद ने ली। मुट्ठी भर सैनिकों के साथ बारूद लेकर अफगानिस्तान से भागकर भारत आए बाबर ने ​शक्तिशाली दिल्ली सल्तनत को खत्म कर मुगल वंश की नींव डाली। इस बारूद के बाद हाइड्रोजन बम, परमाणु बम जैसे शक्तिशाली बमों की अंतहीन कहानी शुरू हो गई। अब 21वीं सदी में दुनिया एक दम बदल गई है। अब शक्ति का मतलब है AI, Digital Network और Data… अब भारत इसके लिए तैयार हो रहा है।

सेना ने बनाया 2026 का रोडमैप

चीन से एक और पाकिस्तान से 4 हमलों को झेल चुके भारत पर अगर आगे कोई हमला होता है तो भारत AI, Digital Network और Data के जरिए जंग लड़ेगा। भारत ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है (India future war strategy)। ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के साथ 88 घंटे के सघन युद्ध के बारीकी से विश्लेषण करने के बाद सेना ने अपनी रणनीति में अहम बदलाव की रूपरेखा तैयार की है। सेना ने अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक निर्णयों और उनके आधार पर ऑपरेशनल स्तर होने वाले बदलाव का प्रारूप भी तैयार किया है। इसके लिए सैन्य तैयारियों में अल्पकालिक रणनीति के तहत 2026 का रोडमैप बनाया गया है। सेना के सूत्रों ने बताया कि इस साल पूरा जोर नए हथियार हासिल करने की बजाए युद्ध के समूचे वातावरण की त्वरित जानकारी, डिजिटल नेटवर्क और तेज फैसलों पर केंद्रित रहेगा।

सेना ने 2026 को Networking और Data Centricity Year घोषित किया

इसी सोच के तहत सेना ने साल 2026 को ‘Networking और Data Centricity’ और 2027 में ऑपरेशंस के AI से पूर्ण इंटीग्रेशन के रूप में मनाने का फैसला किया है। रणनीति तैयार करने की प्रक्रिया से नजदीकी से जुड़े एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि यह फैसला सेना की लंबे समय से चल रही परिवर्तन योजना का अगला कदम है। सेना ने साल ‘2023 से 2032’ को परिवर्तन का दशक घोषित किया हुआ है। इसके तहत 2023 में संगठन, सोच और काम करने के तरीकों में सुधार 2024 और 2025 को ‘तकनीक आत्मसात करना और 2025 में जमीनी स्तर पर बदलाव का रोडमैप अपनाया गया।

सही समय पर सटीक जानकारी से सफल हुआ था ऑपरेशन सिंदूर

सेना की एक स्टडी में यह सामने आया कि Operation Sindoor के दौरान सही समय पर सटीक जानकारी कितनी जरूरी है। आधुनिक सिस्टम और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल से की गई कार्रवाई के बेहद कारगर नतीजे सामने आए। सेना के Military Operations Room में पूरी योजना बनाई गई। वहीं से आतंकी ठिकानों को नष्ट करने वाले ऑपरेशन की करीबी निगरानी की गई। इस दौरान सीडीएस और तीनों सेनाओं के प्रमुख Military Operations Branch में मौजूद रहे।

Operation Sindoor की सफलता का श्रेय इन सैन्य हथियारों को दिया

  • ड्रोन रोधी सिस्टम (Anti Drone System)
  • बहु-स्तरीय वायु रक्षा (Multilayer Air Defence)
  • नई आर्टिलरी क्षमताएँ (New Artilery Capabilities)
  • शक्तिबाण रेजीमेंट्स और दिव्यास्त्र बैटरियां (Shaktibaan Regiments and Divyaastra Batteries)
  • हर इन्फैंट्री बटालियन में ड्रोन प्लाटून (Drone platoon in every Battalian)

डिजिटल नेटवर्क, डेटा सेंटर और सॉफ्टवेयर सिस्टम का साझा प्लेटफॉर्म बनेगा

इन अवयवों को आपस में जोड़ने के लिए 2026–27 में नेटवर्किंग और डेटा पर जोर दिया जा रहा है। सेना देशभर में फैले अपने Digital Network, Data Center and Software System Centers का एक साझा प्लेटफॉर्म तैयार करेगी, ताकि इससे जंगी मैदान में तैनात सैनिक से लेकर वरिष्ठ कमांडर तक सबको एक जैसी और ताजा जानकारी मिल सकेगी।

एआई और ऑटोमेशन से मिलेगी सूचना, इससे जल्द लेंगे फैसले

इस नई व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन भरपूर इस्तेमाल किया जाएगा। इससे रणभूमि के हालात की तस्वीर जल्दी सामने आएगी और फैसले तेज और सही लिए जा सकेंगे। यह तीन स्तंभों पर खड़ा होगा– Data, Digital Network and army Data को सामरिक संसाधन के तौर पर देखा जाएगा। साइबर तंत्र के माध्यम से तय किया जाएगा कि कौन-सी जानकारी कहां से आएगी, कौन उसका इस्तेमाल करेगा और उसे कैसे सुरक्षित रखा जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय बिरादरी, दुश्मन और घरेलू कम्युनिकेशन के लिए अलग माध्यम

ऑपरेशन सिंदूर से सबक लेते हुए Strategic Communication में भी बदलाव किए जा रहे हैं। योजना यह है कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी, दुश्मन और घरेलू कम्युनिकेशन के लिए अलग-अलग कंटेंट और माध्यम तय हों। नैरेटिव वॉर में दुश्मन के झूठ तंत्र को फेल किया जाए। राजनीतिक नेतृत्व, तीनों सेनाओं के बीच संवाद और मीडिया के साथ तालमेल को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना की बढ़ी ताकत-

  • पिनाका रॉकेट सिस्टम्स की दो नई रेजीमेंट शामिल हुईं
  • तीन एएच अपाचे हेलीकॉप्टर मिले
  • 25 नई भैरव लाइट कमांडो बटालियनें मिलीं
  • बड़े पैमाने पर टीथर्ड ड्रोन, स्वार्म ड्रोन, लॉजिस्टिक ड्रोन और कामाकाजी ड्रोन सेना को मिले हैं।

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