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कौन हैं बी सुदर्शन रेड्डी, जिन्हें इंडिया गठबंधन ने चुना उपराष्ट्रपति उम्मीदवार

देवरिया। उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए अब मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। सत्ता पक्ष की ओर से एनडीए पहले ही महाराष्ट्र के राज्यपाल और वरिष्ठ भाजपा नेता सीपी राधाकृष्णन का नाम घोषित कर चुका है। वहीं अब विपक्षी इंडिया (INDIA) गठबंधन ने भी अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज और गोवा के पहले लोकायुक्त रह चुके जस्टिस (रिटायर्ड) बी. सुदर्शन रेड्डी (b sudarshan reddy)विपक्षी खेमे के उम्मीदवार होंगे।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी दलों की बैठक के बाद उनके नाम का औपचारिक ऐलान किया। अब 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव में दोनों नेताओं के बीच सीधी टक्कर देखने को मिलेगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 21 अगस्त यानी कल बुधवार तय की गई है।

कौन हैं बी. सुदर्शन रेड्डी?

जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी (b sudarshan reddy) का जन्म 8 जुलाई 1946 को आंध्र प्रदेश के रंगा रेड्डी ज़िले के आकुला मायलारम गांव में एक किसान परिवार में हुआ। उन्होंने 1971 में उस्मानिया यूनिवर्सिटी से क़ानून की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के बाद उन्होंने हैदराबाद के वरिष्ठ अधिवक्ता के. प्रताप रेड्डी के मार्गदर्शन में सिविल और संवैधानिक मामलों की वकालत शुरू की। साल 1988 में वे आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में गवर्नमेंट प्लीडर बने और बाद में केंद्र सरकार के लिए एडिशनल स्टैंडिंग काउंसिल का दायित्व निभाया।1991 में जस्टिस रेड्डी को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में जज नियुक्त किया गया।

लंबे समय तक न्यायपालिका में योगदान देने के बाद वे सुप्रीम कोर्ट के जज बने और अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण फैसलों का हिस्सा रहे। रिटायरमेंट के बाद उन्हें गोवा का पहला लोकायुक्त बनाया गया। इस दौरान उन्होंने अपनी ईमानदार और सख्त छवि से पहचान बनाई। भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में उन्होंने बिना किसी दबाव के कार्रवाई की और हमेशा पारदर्शिता की वकालत की।

क्या है विपक्ष की रणनीति ?

इंडिया गठबंधन का मानना है कि जस्टिस रेड्डी जैसी सख्त और साफ-सुथरी छवि वाले व्यक्ति को उपराष्ट्रपति पद की दौड़ में उतारने से जनता और विपक्षी खेमे को एक मजबूत संदेश जाएगा। विपक्ष इस चुनाव को केवल सत्ता पक्ष बनाम विपक्ष के तौर पर नहीं बल्कि संविधान और न्यायपालिका की गरिमा की लड़ाई के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है। यही वजह है कि उन्होंने एक पूर्व जज और लोकायुक्त रहे रेड्डी को उम्मीदवार बनाकर न्यायपालिका और ईमानदारी का चेहरा सामने रखा है।

मुकाबले में सीपी राधाकृष्णन

दूसरी ओर, एनडीए ने तमिलनाडु के वरिष्ठ नेता और भाजपा के पुराने चेहरों में से एक सीपी राधाकृष्णन को मैदान में उतारा है। राधाकृष्णन दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और लंबे समय तक पार्टी संगठन में सक्रिय रहे। फिलहाल वह महाराष्ट्र के राज्यपाल के पद पर कार्यरत हैं। भाजपा का मानना है कि राष्ट्रीय राजनीति और संगठनात्मक अनुभव उन्हें उपराष्ट्रपति पद का उपयुक्त उम्मीदवार बनाता है।

अब 9 सितंबर को होने वाले चुनाव में देखना होगा कि न्यायपालिका से जुड़े सुदर्शन रेड्डी का अनुभव भारी पड़ता है या फिर राजनीति के अनुभवी चेहरा सीपी राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति की कुर्सी तक पहुंचते हैं। मुकाबला निश्चित रूप से कड़ा और रोचक रहने वाला है।

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