देवरिया। होली का त्योहार बस आने ही वाला है। बाजार रंग-बिरंगे गुलाल और तरह-तरह की पिचकारियों से सज गए हैं। रंगों का यह त्योहार अपने आप में अलग है। यह त्योहार सज-धज कर नए कपड़े पहन कर नहीं बल्कि पुराने कपड़ों में रंग से सराबोर होकर मनाया जाता है। रंग और गुलाल की वजह से हम अपने आप को भी नहीं पहचान पाते हैं। रंग खेलते वक्त जितना मजा आता है, उसे छुड़ाते वक्त उतनी ही मेहनत लगती है और स्किन एलर्जी होने का भी डर रहता है। अगर आप कुछ बातों का ध्यान रखेंगे तो आप अपनी स्किन को एलर्जी से भी बचा सकते हैं और शरीर से रंग भी आसानी से छुड़ा सकते हैं। सन्सक्रीम आपको धूप से होने वाले डैमेज से बचाएगा।

होली खेलने से पहले यूज करें बॉडी ऑयल या मॉइश्जराइजर

होली पर रंगों का सबसे ज्यादा और सीधा प्रभाव चेहरे और शरीर की त्वचा पर पड़ता है। रंग सीधे स्किन के संपर्क में ना आए इसके लिए होली खेलने जाने से पहले पूरे शरीर पर अच्छा मॉइश्चराइजर या बॉडी आइल लगा लें। इसके ऊपर अच्छे एसपीएफ का सन्सक्रीम लगाना ना भूलें। माइश्चराइजर से शरीर पर चिकनाई बनी रहती है और रंग शरीर पर नहीं चढ़ता जिससे किसी एलर्जी का खतरा नहीं रहता और नहाते वक्त रंग जल्दी छूट जाता है। ध्यान रहे कानों के अंदर और होठों को भी मॉइश्चराइज करें।

बालों में अच्छी तरह ऑयलिंग करें

चेहरे की तरह बालों पर भी रंगों का प्रभाव पड़ता है। केमिकल से बने रंगों से बालों को और सर के स्कैल्प्स को डैमेज होने से बचाने के लिए इन्हें भी मॉइस्चर की जरूरत होती है, ताकि रंग सीधा बालों पर न पड़े। होली से पहले वाली रात में ही बालों में जड़ों से लेकर सिरों तक अच्छी तरह से तेल लगा लें और होली खेलने जाने से पहले चोटी बांध लें या बन बना लें। चाहें तो शॉवर कैप का भी इस्तेमाल कर सकते हैं मार्केट में और ऑनलाइन स्टोर्स पर भी कम दमों में शॉवर कैप उपलब्ध हैं।

केमिकल वाले रंगों से बचे, हर्बल रंगों का करें इस्तेमाल

आजकल बाजार में हर्बल गुलाल और हर्बल रंग उपलब्ध हैं। इन्हें इस्तेमाल करना सबसे अच्छा होता है। इससे ना तो किसी प्रकार का नुकसान होता और ना ही एलर्जी। प्राकृतिक फूल और पत्तियों से बने ये रंग दिखने में भी सुंदर होते हैं, और बाजार में हर रंग के मिलते हैं साथ ही खुशबूदार भी होते हैं। बाजार में मिलने वाले सिल्वर और गोल्डन रंग, स्प्रे रंग और कैमिकल वाले गुलाल शरीर की त्वचा के लिए तो हानिकारक होत ही हैं गलती से आंखों या कानों में चले गए तो गंभीर समस्या हो सकती है। कानों में गुलाल के रंग जमा ना हों इसके लिए हमें कानों में रुई के फाहे डाल लेने चाहिए। छोटे बच्चों के लिए होली के लिए खास चश्मे बाजार में मिलते हैं। इन चश्मों से आंखों को काफी हद तक रंगों से बचाया जा सकता है। रंग खेलते वक्त अगर आंखों में गलती से रंग चला जाए तो तुरंत साफ पानी से आंखों को धोएं।

शरीर से रंग निकालने के लिए क्या करें

होली खेलने के बाद सबसे बड़ा टास्क होता है रंग छुड़ाना। रंग छुड़ाने के लिए क्लिनजिंग मिल्क का उपयोग किया जा सकता है। रुई के फाहे में क्लिंनजिंग मिल्क लेकर चेहरे पर हल्के हाथों से रगड़ने से रंग निकलने लगेगा। शरीर का रंग छुड़ाने के लिए थोड़े से बेसन में हल्दी, कच्चा दूध या दही और गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बना लें और जहां से रंग छुड़ाना है, वहां लेप लगाकर कुछ देर छोड़ दें। जब आपका लेप आधा सूख जाए तब ऊपर से तेल लगाकर रगड़ें, इससे उबटन रंगों को अपन साथ लपेटते हुए निकल जाएगा और स्किन भी रूखी नहीं लगेगी। नहाने के बाद चेहरे पर माइश्चराइजर और सन्सक्रीम लगाना ना भूलें।

किसी भी प्रकार की एलर्जी हो तो क्या करें

अगर रंगों से किसी प्रकार की जलन या रेशेस हो जाएं तो उस पर एलोवेरा जेल या खीरे का रस लगाएं। एलर्जी ज्यादा हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। अगर हाथ पैर से रंग नहीं निकल रहे तो ज्यादा जोर ना लगाएं बल्कि हाथों और पैरों की वैक्सिंग करा लें इससे स्किन पर जमें रंग और टैनिंग दोनों से ही छुटकारा मिल जाएगा। कोशिश करें होली के ठीक पहले किसी प्रकार का स्किन या हेयर ट्रीटमेंट ना लें। स्किन पर हुए किसी भी प्रकार के ट्रीटमेंट के बाद कुछ दिनों के लिए स्किन की ऊपरी परत हट जाती है, इस पर रंग पड़ने से इसका सीधा असर त्वचा पर पड़ता है और स्किन इरिटेशन, स्किन इनफ्लेमेशन, एक्ने की समस्या हो जाती है।