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भारत के इतिहास, संस्कृति और लोक की त्रिवेणी को दर्शाता जी-20 सम्मेलन का पहला दिन, देखिए खूबसूरत तस्वीरें

देवरिया।जी-20 शिखर सम्मेलन की शानदार शुरुआत शनिवार को हुई।सम्मेलन के दूसरे सत्र में ‘नई दिल्ली लीडर्स घोषणा-पत्र’ को मंज़ूरी मिली।बैठक में शामिल सभी देशों ने ‘नई दिल्ली लीडर्स घोषणा-पत्र’ पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके लिए सभी देशों का आभार जताया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जी-20 देशों के मेहमानों के लिए डिनर होस्ट किया।
2 दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन का आयोजन दिल्ली स्थित भारत मंडपम में किया गया है। पहले दिन 20 बड़े देशों के प्रमुखों ने एक साथ कई विषयों पर चर्चा की। सम्मेलन में पहुंचने वाले सभी प्रमुख नेताओं और प्रमुख संगठनों के प्रमुख का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वागत किया।भारत मंडपम का नजारा देखते ही बन रहा है।


पीएम के पोडियम पर लिखे भारत ने खींचा ध्यान
G-20 सम्मेलन के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी देशों के प्रमुखों को संबोधित किया। भाषण के दौरान पीएम के सामने रखी प्लेट ने सबका ध्यान खींचा, जिस पर इंडिया की जगह इंग्लिश में ‘BHARAT’ लिखा हुआ था। देश के नाम का मुद्दा हाल ही में काफी गरमाया है और अब इतने बड़े स्थान पर जहां पीएम विश्व के 20 शीर्ष देशों को संबोधित कर रहे हैं, ऐसे में देश के नाम की जगह पर भारत लिखा होना अपने आप में एक बड़ा बदलाव है। इससे पहले किसी भी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में देश का नाम इंडिया ही लिखा जाता रहा है। इसके बाद देश का नाम बदले जाने को लेकर जो सुगबुगाहट कुछ थमी थी उसे फिर हवा मिल गई है।

G-20 में कोणार्क सूर्य मंदिर के चक्र का क्या है महत्व
पहले दिन सभी देश के प्रमुख एक-एक करके सम्मेलन में शिरकत कर रहे थे और पीएम मोदी सभी का बड़ी गर्मजोशी से स्वागत कर रहे थे। जिस स्थान पर मोदी सबसे हाथ मिलाकर मिल रहे थे, वहां पीछे कोणार्क के सूर्य मंदिर के कोणार्क चक्र की प्रतिकृति लगी हुई थी। जब अमरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन वहां पहुंचे तब उन्होंने कुछ देर रुक कर पीएम मोदी से उस चक्र के बारे में बात की और पीएम ने उन्हें उसके बारे में समझाते हुए नजर आए। दरअसल कोणार्कके सूर्य मंदिर का यह चक्र अपने आप में काफी महत्वपूर्ण है।। यह चक्र भारत के प्राचीन ज्ञान, उन्नत सभ्यता और वास्तुशिल्प उत्कृष्टता का प्रतीक माना जाता है। चक्र की घूमती गति समय, कालचक्र के साथ-साथ प्रगति और निरंतर परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है।


G-20 में शामिल होने के बाद AU प्रमुख ने मोदी को गले लगाया
G-20 में सम्मेलन के पहले दिन अफ्रीकी संघ ने जी-20 की सदस्यता ग्रहण की। जी-20 के गठन के बाद पहली बार कोई नया सदस्य इस संगठन में शामिल हुआ है। पीएम मोदी ने सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए 55 देशों वाले अफ्रीकी संघ को नए सदस्य के तौर पर शामिल किए जाने का प्रस्ताव पेश किया जिसे सभी सदस्य देशों ने स्वीकार कर लिया। जिसके बाद पीएम नेकोमोरोस संघ के राष्ट्रपति और अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष अजाली असौमानी से अन्य नेताओं के साथ मंच साझा करने का अनुरोध किया। विदेश मंत्री एस जय शंकर ने उन्हें अपने स्थान तक ससम्मान पहुंचाया। अपनी सीट पर बैठने से पहले अजाली ने पीएम मोदी से हाथ मिलाया और बड़ी आत्मीयता से उनसे गले भी मिले।

G-20 में पीएम मोदी के संबोधन की बड़ी बातें-
• G20 सम्मेलन में अपने संबोधन की शुरुआत में पीएम ने मोरक्को में आए भूकंप का जिक्र किया और प्रभावित लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि- ‘कुछ देर पहले मोरक्को में आए भूकंप से प्रभावित लोगों के प्रति में अपनी संवेदना प्रकट करना चाहता हूं। हम प्रार्थना करते हैं कि सभी घायल लोग शीघ्र स्वस्थ हों। इस कठिन समय में पूरा विश्व समुदाय मोरक्को के साथ है। हम उन्हें हर संभव सहायता पहुंचाने के लिए तैयार हैं।’
• पीएम ने कहा- वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल हो, उत्तर और दक्षिण में डिवाइड हो, पूर्व और पश्चिम की दूरी हो, भोजन, ईंधन और उर्वरक का प्रबंधन हो, आतंकवाद साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा या जल सुरक्षा, हमें भावी पीढ़ियों के लिए इसका ठोस समाधान ढूंढ़ना होगा।
• “भारत की जी20 अध्यक्षता देश के अंदर और बाहर, दोनों जगह समावेश का प्रतीक बन गई है। यह भारत में लोगों का जी-20 बन गया है, 60 से अधिक शहरों में 200 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। हम ऐसे दौर में जी रहे हैं, जब सदियों पुरानी समस्याएं जवाब मांग रही हैं, हमें मानव-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने की जरूरत है।अब समय आ गया है कि वैश्विक भलाई के लिए हम सब साथ मिलकर चलें”

• “इस समय में, ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ का मंत्र हमारे लिए पथप्रदर्शक हो सकता है। आज, G20 के अध्यक्ष के रूप में, भारत पूरी दुनिया से वैश्विक विश्वास की कमी को विश्वास में बदलने का आह्वान करता है। यह हम सभी के लिए एक साथ आगे बढ़ने का समय है।”


• “कोविड महामारी के बाद, दुनिया को विश्वास की कमी की एक नई चुनौती का सामना करना पड़ा और युद्धों ने इसे और गहरा कर दिया है, लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि अगर हम कोविड जैसी महामारी को हरा सकते हैं, तो हम इस विश्वास की कमी पर भी जीत हासिल कर सकते हैं।”



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