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अमीन सयानी: अमर है जिनकी आवाज और अंदाज, जब गीतमाला लेकर आते थे कर्फ्यू सा लग जाता था

देवरिया। अमीन सयानी, ये नाम सुनते ही रेडियो आंखों के सामने आता है और कानों में गूंजने लगती है मखमली, सुरीली और ध्वनि तरंगों से प्रेम करती हुई, अपने श्रोताओं से बात करती हुई आवाज। ऐसी आवाज जिसने बिना चेहरे लाखों लोगों की दीवानगी पाई और आवाज की दुनिया में अमर हो गई। ऐसी आवाज, जिसने न जाने कितने रेडियो उद्घोषकों और प्रस्तुतकर्ताओं को गढ़ा, ऐसी आवाज जो खामोश हुई तो रेडियो उदास हो गया।

अमर रहेगी आवाज और अंदाज

अपनी आवाज से दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाले अमीन सयानी का निधन हो गया है। आवाज की दुनिया के शहंशाह अमीन सयानी ने 20 फरवरी को 91 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविद कह दिया। अमीन सयानी के साथ ही रेडियो जगत का एक गोल्डन एरा खत्म हो गया। लेकिन उनकी आवाज और अंदाज यादगार रहेंगे। जब-जब कोई रेडियो पढ़ने बैठेगा, कोई रेडियो के लिए लिखने बैठेगा या कोई रेडियो का माइक थामेगा, अमीन सयानी सिलेबस बन जाएंगे। उनके निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत बड़ी हस्तियों ने श्रद्धांजलि दी है। श्रोताओं ने भी अपने प्रिय रेडियो प्रेजेंटर को नमन किया है।

दिल का दौरा पड़ने से हुआ निधन

अमीन सयानी के बेटे राजिल सयानी ने उनके निधन की जानकारी दी। उन्होंने बताया- 20 फरवरी की रात उन्हें सांस लेने में कुछ तकलीफ हुई थी, जिसके बाद उन्हें एचएन रिलायंस अस्पताल में भर्ती किया गया था। अस्पताल में ही इलाज के दौरान दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। बेटे ने बताया कि अमीन सयानी का अंतिम संस्कार गुरुवार को किया जाएगा। अंतिम संस्कार मुंबई में ही किया जाएगा जिसके लिए कुछ करीबी रिश्तेदारों का इंतजार किया जाएगा।

‘गीतमाला’ जिसे सुनने के लिए सड़कें हो जाती थी सूनी

सयानी जी की मखमली आवाज के दीवाने भारत के लोग ही नहीं बल्कि दूसरे मुल्क में भी थे। 70 के दशक में जैसे ही गीतमाला का समय होता, पूरे देश की सड़कें सूनी हो जाया करती थीं। अमीन सयानी की आवाज में बिनाका गीतमाला सुनने के लिए रेडियो प्रेमी अपने-अपने रेडियो सेट को ट्यून करके बैठ जाते थे। बिनाका गीतमाला जो बाद में सिबाका गीतमाला के नाम से प्रसारित होने लगा था, अपने समय का सबसे हिट रेडियो प्रोग्राम था। बॉलीवुड गीतों से सजे इस संगीतमयी कार्यक्रम की लोकप्रियता दिलाने का पूरा श्रेय जाता है अमीन सयानी जी की आवाज को। उनके, बहनों और भाइयों…कहने के अंदाज के ही लाखों लोग दीवाने थे। उनके प्रशंसकों के साथ ही बड़े बॉलीवुड कलाकार भी उनके इस अंदाज को कॉपी करने की कोशिश करते थे।

बड़े भाई के जरिए मिला था रेडियो में काम

अमीन सयानी का जन्म मुंबई में 1932 में हुआ था। अपने रेडियों के सफर की शुरुआत का जिक्र करते हुए उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब वो सिर्फ 9 साल के थे तब उनके बड़े भाई हमीद सयानी उन्हें ऑल इंडिया रेडियो के बॉम्बे स्टेशन ले गए थे। हमीद सयानी भी रेडियो में ही काम किया करते थे। तब उन्होंने पहली बार अपनी आवाज रिकॉर्ड करके सुनी। बस उस दिन से ही रेडियो से उनका रिश्ता जुड़ गया। आपको बता दें कि हमीद सयानी को ही अमीन सयानी अपना गुरु भी मानते थे। अमीन सयानी ने 1951 से ही रेडियो के लिए काम करना शुरू किया। पहले उन्होंने अंग्रेजी ब्रॉडकास्टर्स के रूप में काम शुरू किया था। लेकिन श्रोताओं को उनका हिंदी और ऊर्दू का लहजा इतना पसंद आया कि उनके कार्यक्रम की डिमांड आनी शुरू हो गई और 1952 में रेडियो सिलोन से शुरू हुआ उनका सबसे चर्चित रेडियो शो ‘गीतमाला’। बाद में विविध भारती में इसका प्रसारण शुरू हो गया।

भारत सरकार ने पद्मश्री से किया था सम्मानित

अमीन सयानी ने लगभग 54 हजार रेडियो प्रोग्राम प्रोड्यूस और कंपेयर किए थे, इसके साथ ही 19 हजार जिंगल भी रिकॉर्ड किए हैं। वे अपने समय की कुछ बॉलीवुड फिल्मों जैसे भूत बंगला, तीन देवियां, बॉक्सर और कत्ल में भी नजर आ चुके हैं। वो पहले ऐसे अनाउंसर थे जिन्होंने अपने कार्यक्रमों और इंटरव्यू में मिश्रित भाषा का उपयोग किया। उनके संवाद की इस शैली को हर उम्र और हर तबके के लोगों ने पसंद किया। आज भी रेडियो जॉकी उनके अंदाज की नकल करना चाहते हैं। आवाज की दुनिया में उनकी उपलब्धियों के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।

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